भिलाई। भिलाई नगर निगम के महापौर नीरज पाल और निगम आयुक्त राजीव पांडेय के बीच विवाद गहरा गया है। महापौर पाल ने एमआईसी मेंबर्स के साथ कलेक्टर को निगम आयुक्त पाण्डेय के खिलाफ शिकायत का ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन मुख्य सचिव छत्तीसगढ़ शासन के नाम से सौंपा गया है, जिसमें आयुक्त के खिलाफ विधि सम्मत कार्रवाई की मांग की गई है।
मेयर नीरज पाल ने हरिभूमि को बताया कि, हाल ही में ही नगर पालिक क्षेत्रांतर्गत संजय नगर मैदान सहित अन्य भूमि की नीलामी से संबंधित विभिन्न प्रकार की भ्रांतियां सोशल मीडिया व समाचार पत्रों के माध्यम से कुछ जनप्रतिनिधि और अधिकारियों ने फैलाई हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले में सच्चाई ये है कि साल 2021-2022 में नगर निगम की आर्थिक तंगी एवं विकास कार्यों को गति देने के लिए महापौर परिषद ने जनहित को देखते हुए ये निर्णय लिया था कि निगम क्षेत्र की समस्त व्यवसायिक जमीन को 30 वर्षों के लिए लीज में देकर शहर के विकास को गति प्रदान की जाए।
अनुमति न मिलने पर भी मंगाया टेंडर
परिषद के इस निर्णय का प्रस्ताव शासन को अनुमति के लिए भेजा गया था। शासन से इसकी अनुमति नहीं मिलने के बाद भी आयुक्त भिलाई ने उपरोक्त भूमियों की नीलामी के लिए सार्वजनिक निविदा आमंत्रित कर दी। यह पूरी तरह से राज्य शासन, एम.आई.सी. एवं सामान्य सभा के अधिकारों का हनन है। उन्होंने कहा कि नगर निगम अधिनियम में किसी भी भूमि को बेचे जाने का अधिकार ही नहीं है। पूर्व में भी नगर निगम आयुक्त द्वारा नियमों की अनदेखी कर लगातार नगर निगम के विकास कार्यों की निविदाओं में व्यक्तिगत लोगों को लाभ पहुंचानें निविदा निकाली गई है।
मनमाने तरीके से मद का किया दुरुपयोग
महापौर ने आरोप लगाया कि आयुक्त ने डीएमएफ मद से 4.50 करोड़ के कार्य की स्वीकृति बिना तकनीकी स्वीकृति, एम.आई.सी. एवं सामान्य सभा में लाये दे दी। इसी तरह वार्ड 4 में 21 करोड़ 54 लाख के कार्यों की विधि विरुद्ध स्वीकृति दी। शासन के आदेश पर निगम ने 1248 प्लाटों की ई-नीलामी की थी। इससे मिली राशि को मनमाने ढंग से दुरुपयोग किया गया जबकि शासन का स्पष्ट निर्देश था, कि नीलामी के बाद एक हिस्सा राजकोष में जमा होना था। निगम कमिश्नर से ठेकेदार भी परेशान है। जो ठेकेदार उन्हें तय कमीशन देता है। उसका भुगतान तत्काल कर दिया जाता है। इस मामले में निगम आयुक्त राजीव पांडेय ने कोई बयान नहीं दिया है।