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उपमुख्यमंत्री अरुण साव बीजापुर जिले के दौरे पर हैं। संयुक्त अनुसूचित जाति समिति के लोगों ने उन्हें ज्ञापन सौंपा। उन्होंने बताया कि, मूलनिवासी होने के बाद भी उन्हें जिला प्रशासन में अवसर नहीं मिल रहा। 

श्याम करकू – बीजापुर। उपमुख्यमंत्री अरुण साव बीजापुर जिले के दौरे पर हैं। संयुक्त अनुसूचित जाति समिति के लोगों ने उन्हें ज्ञापन सौंपा। इस बारे में अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों ने कहा कि, छत्तीसगढ़ राज्य का जिला बीजापुर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति बाहुल्य जिला है। इस जिले में 82% प्रतिशत से भी अधिक जनसंख्या अनुसूचित जनजाति की है। भारत सरकार ने पिछले साल माहरा और महरा जाति को अनुसूचित जाति वर्ग में शामिल किया था। इससे अनुसूचित जाति वर्ग की जनसंख्या बढ़कर लगभग 15% प्रतिशत से ज्यादा हो गई है इसके अलावा अन्य वर्ग के लोग भी जिले में निवासरत हैं।

अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों ने कहा कि, जिले के ग्राम पंचायतों, जनपद पंचायतों और जिला पंचायतों में जिले के अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोगों को पंचायतों में आरक्षण के आधार पर स्थान सुरक्षित है। साथ ही जिले में अन्य वर्ग के लोग जिनकी जनसंख्या लगभग 2 प्रतिशत के आसपास है उनके लिए भी ग्राम पंचायतों, जनपद पंचायतों और जिला पंचायतों में सीटें आबंटित किया गया है। 

यहां देखें ज्ञापन की कॉपी...

मूलनिवासियों को जिला प्रशासन में प्रतिनिधित्व का नहीं मिल रहा मौका 

वर्तमान में जिला पंचायत बीजापुर में सामान्य वर्ग के लिए 2 सीटें है। लेकिन अनुसूचित जाति वर्ग जिनकी जनसंख्या लगभग 15% प्रतिशत है जो कि बीजापुर जिले के मूल निवासी भी हैं उनके लिए आज तक ग्राम पंचायतों, जनपद पंचायतों और जिला पंचायतों में प्रतिनिधित्व करने का अवसर प्राप्त ही नहीं हुआ। इसलिए बीजापुर जिले के ग्राम पंचायतों, जनपद पंचायतों और जिला पंचायतों का पुनः आरक्षण कराया जाना अति आवश्यक है, जिससे कि सभी वर्गों के लोगों को सामान रूप से ग्राम पंचायतों, जनपद पंचायतों और जिला पंचायतों में प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिल सके। 

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