पीएम श्री स्कूल सारंगढ़ के फेयरवेल कार्यक्रम में स्कूली छात्र कार और ट्रैक्टर से स्टंट करते नजर आ रहे हैं। घटना के वायरल वीडियो के बाद लोगों ने जांच की मांग की है।

देवराज दीपक- सारंगढ़। पीएम श्री स्कूल सारंगढ़ के फेयरवेल कार्यक्रम का एक चौंकाने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में स्कूली छात्र कार और ट्रैक्टर से स्टंट करते नजर आ रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि ये सभी छात्र नाबालिग बताए जा रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर इन बच्चों के हाथों में कार और ट्रैक्टर की चाबी कैसे पहुंची?

मिली जानकारी के अनुसार, फेयरवेल कार्यक्रम के दौरान कुछ छात्रों ने खुलेआम वाहन चलाते हुए स्टंट किए। तेज रफ्तार में कार घुमाना और ट्रैक्टर पर जोखिम भरे करतब करना किसी बड़े हादसे को न्योता देने जैसा था। गनीमत रही कि कोई अनहोनी नहीं हुई, लेकिन यह लापरवाही किसी भी समय गंभीर दुर्घटना में बदल सकती थी। 

शिक्षा विभाग और प्रशासन पर उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। स्कूल परिसर या कार्यक्रम के दौरान इस तरह की गतिविधि आखिर किसकी अनुमति से हुई? क्या स्कूल प्रबंधन को इसकी जानकारी नहीं थी? यदि जानकारी थी तो रोकथाम क्यों नहीं की गई? नाबालिग छात्रों द्वारा वाहन चलाना कानूनन अपराध है। ऐसे में यह केवल अनुशासनहीनता का मामला नहीं, बल्कि सुरक्षा से जुड़ा बड़ा मुद्दा है। अभिभावकों में भी इस घटना को लेकर नाराजगी देखी जा रही है।

बड़ी दुर्घटना से बाल-बाल बचे छात्र
विशेषज्ञों का कहना है कि स्टंट जैसे करतब प्रशिक्षित लोगों द्वारा भी नियंत्रित माहौल में किए जाते हैं। यहां बिना किसी सुरक्षा इंतजाम के नाबालिग बच्चों द्वारा वाहन स्टंट करना गंभीर लापरवाही है। थोड़ी सी चूक कई जिंदगियां खतरे में डाल सकती थी।

जांच और कार्रवाई की मांग
घटना के वायरल वीडियो के बाद स्थानीय लोगों ने जांच की मांग की है। शिक्षा विभाग से अपेक्षा की जा रही है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। फेयरवेल जैसे खुशी के मौके को जोखिम भरे खेल में बदल देना चिंता का विषय है। अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाते हैं।