राजिम के वार्ड क्रमांक 14 पथर्रा स्थित मुक्तिधाम के लिए स्थानीय प्रशासन को ध्यान दिए जाने की जरूरत है। पथर्रा मुक्तिधाम में छांव के लिए लोगों को भटकना पड़ता है। 

श्यामकिशोर शर्मा- राजिम। राजिम नगर पालिका क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 14 पथर्रा स्थित मुक्तिधाम के लिए स्थानीय प्रशासन को ध्यान दिए जाने की जरूरत है। शवदाह के लिए प्लेटफार्म बना है, वहीं बाजू से एक प्रतिक्षालय भी है जो बहुत छोटा है। यह प्रतीक्षालय शवदाह गृह से लगा हुआ है, लिहाजा अंतिम संस्कार के समय जब मुखाग्नि दी जाती है तो इसके उठते धुआं प्रतिक्षालय में नजदीक होने के कारण घुस जाता है। लोग यहां बैठ नही पाते। इस स्थल की स्थिति इस तरह का है जहां दूसरा कोई विकल्प नजर नही आता। 

एक बरगद का झाड़ है, जहां चंद लोग ही छाया के नाम पर बैठ पाते है बाकी मैदान न केवल अटपटा है बल्कि गंदगियो से सराबोर है। छांव की तलाश में मुक्तिधाम पहुंचने वालो को आसपास के घरो के सामने खड़ा होना पड़ता है इस मुक्तिधाम में पेयजल के लिए न तो बोरिंग है और न ही अन्य कोई साधन। शनिवार को दोपहर में पथर्रा के एक गणमान्य नागरिक के निधन हो जाने पर इस मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया। कै से भी करके असुविधाओं के बीच अंतिम क्रियाकर्म परिवार के लोगो ने किया। इस दौरान मौजूद सैकड़ो लोगो को छांव की तलाश करते देखा गया। गर्मी में छांव की तलाश तो स्वभाविक ही है। बारिशकाल में बरसते पानी के बीच क्या स्थिति होती होगी यह समझा जा सकता है। 

पथर्रा मुक्तिधाम में गंदगी 

महानदी के किनारे बना है मुक्तिधाम 
ये मुक्तिधाम वार्ड नं 14-15  के लिए खास मायने रखता है। राजिम नगर पालिका क्षेत्र बड़ा एरिया में बसा हुआ है। हालांकि महानदी किनारे बहुत ही सुंदर और सर्वसुविधायुक्त आलीशान मुक्तिधाम बना जरूर है। मगर दुरस्थ वार्डो के लोगो के लिए यह न केवल काफी दूर पड़ता है बल्कि असुविधाजनक हो जाता है। लोग पथर्रा के इस मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार के लिए सुगमता से पहुंचते है लिहाजा इस मुक्तिधाम के लिए नगर पालिका के चुने हुए पदाधिकारियो एवं संबंधित अधिकारी को ध्यान दिए जाने की जरूरत है। शनिवार को इस मुक्तिधाम में उपस्थित लोगो ने इस दिशा में प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया है। क्योंकि यहां मूलभूत सुविधाओं का गंभीर अभाव देखने को मिल रहा है। 

लोगों को असुविधाओं का करना पड़ता है सामना 
मुक्तिधाम में न तो बैठने की कोई समुचित व्यवस्था है, न ही पीने के पानी की सुविधा उपलब्ध है। इसके अलावा, यहां आने वाले लोगों को धूप और बारिश से बचने के लिए किसी प्रकार की छांव की भी व्यवस्था नहीं है। खुले मैदान में अंतिम संस्कार के दौरान परिजनों और ग्रामीणों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है। स्थिति और भी चिंताजनक तब हो जाती है जब जमीन पूरी तरह समतल नहीं है। स्थल पर बड़े-बड़े पत्थर फैले हुए हैं, जिससे न केवल चलना मुश्किल होता है बल्कि अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में भी बाधा उत्पन्न होती है। 

पथर्रा मुक्तिधाम के चारों तरफ उगे पेड़- पौधे 

स्थानीय लोगों ने सुविधाओं को देने की अपील 
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस स्थान को तत्काल समतल करने और व्यवस्थित की जाए। स्थानीय नागरिकों ने नगरपालिका प्रशासन से मांग की है कि मुक्तिधाम में जल्द से जल्द बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। विशेष रूप से शेड निर्माण, पानी की व्यवस्था, बैठने के लिए बेंच और स्थल का समतलीकरण प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए। मुक्तिधाम एक ऐसा स्थान है जहां लोग अपने प्रियजनों को अंतिम विदाई देने आते हैं। ऐसे में वहां सम्मानजनक और सुविधाजनक व्यवस्था होना अत्यंत आवश्यक है। नागरिकों को उम्मीद है कि प्रशासन इस गंभीर समस्या को संज्ञान में लेकर शीघ्र ही आवश्यक कदम उठाएगा, ताकि अंतिम संस्कार जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में किसी को परेशानी न झेलनी पड़े। 

मुक्तिधाम में बुनियादी सुविधाओं का अभाव 
उल्लेखनीय है कि यह मुक्तिधाम वार्ड नं 14-15 सहित शहर के पीछे के हिस्सों के लोगों के लिए अंतिम संस्कार का प्रमुख स्थान है, लेकिन यहां बुनियादी सुविधाओं का अभाव लोगों की पीड़ा को और बढ़ा रहा है। मुक्तिधाम में एक प्रतीक्षालय का निर्माण तो किया गया है, लेकिन वह अत्यंत छोटा और अनुपयोगी साबित हो रहा है। जब शव दाह किया जाता है, तो उससे उठने वाला धुआँ सीधे प्रतीक्षालय के अंदर भर जाता है, जिससे वहां बैठना मुश्किल हो जाता है। परिणामस्वरूप, लोग चाहकर भी इस सुविधा का उपयोग नहीं कर पाते। शनिवार को हुए एक अंतिम संस्कार के दौरान स्थिति और भी भयावह देखने को मिली। तेज धूप में लोगों को खुले में बैठने को मजबूर होना पड़ा, इस दौरान परिजनों और उपस्थित लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।