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विष्णुदेव साय की सरकार में राजिम कुंभ (कल्प) को संगठित व्यवस्थाओं, आधुनिक सुविधाओं और सांस्कृतिक विस्तार के साथ छत्तीसगढ़ का सबसे भव्य आध्यात्मिक आयोजन बनाया गया।

रायपुर। छत्तीसगढ़ के राजिम में स्थित पवित्र त्रिवेणी संगम जहाँ महानदी, पैरी और सोंढूर नदियाँ मिलती हैं, वर्षों से श्रद्धा और आस्था का प्रतीक रहा है। इसी दिव्य स्थल पर आयोजित राजिम कुंभ (कल्प) आज प्रदेश की सबसे बड़ी धार्मिक-सांस्कृतिक परंपरा के रूप में स्थापित हो चुका है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में 2024 के बाद इस आयोजन को नए स्वरूप, विस्तारित सुविधाओं और बेहतर प्रबंधन के साथ एक भव्य और सुव्यवस्थित स्वरूप मिला है, जिससे यह छत्तीसगढ़ की आध्यात्मिक पहचान का प्रमुख केन्द्र बनकर उभरा है।

Mahashivratri Triveni Sangam

त्रिवेणी संगम: आस्था का पौराणिक केंद्र
राजिम को “छत्तीसगढ़ का प्रयाग” कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार माघ पूर्णिमा से महाशिवरात्रि तक त्रिवेणी संगम में स्नान करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु यहाँ पहुँचकर संगम स्नान, दर्शन और आध्यात्मिक अनुष्ठानों में भाग लेते हैं। राज्य स्तरीय मान्यता वर्ष 2005 में प्राप्त होने के बाद राजिम कुंभ का स्वरूप लगातार विस्तार पाता गया, किंतु 2024 के बाद प्रशासनिक सुधारों ने इसे एक नए आयाम तक पहुँचाया।

साय सरकार में आया परिवर्तन
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राजिम कुंभ को प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर बताते हुए इसकी व्यवस्थाओं को और अधिक मजबूत करने के स्पष्ट निर्देश दिए। वर्ष 2024, 2025 और 2026 के आयोजनों के लिए समयपूर्व तैयारियाँ सुनिश्चित की गईं, ताकि श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएँ मिल सकें। सुरक्षा और ट्रैफिक नियंत्रण की समग्र एवं प्रभावी योजना लागू की गई, जिससे आवागमन सुगम और सुरक्षित बना रहे।

Chief Minister Vishnu Rajim Kumbh

पूरे मेला क्षेत्र में स्वच्छता, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था तथा सीसीटीवी निगरानी को प्राथमिकता दी गई। इसके साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं और आपदा प्रबंधन दलों की विशेष तैनाती कर किसी भी आपात स्थिति से निपटने की पुख्ता व्यवस्था की गई। विशाल मेला मैदान, साधु-संतों के सुव्यवस्थित शिविरों और आकर्षक प्रदर्शनी क्षेत्र की व्यवस्थाओं ने राजिम कुंभ को अधिक सुरक्षित, सुविधाजनक और सुव्यवस्थित स्वरूप प्रदान किया।

राजिम कुंभ कल्प 2024- रामोत्सव थीम की भव्य सफलता
वर्ष 2024 का आयोजन “रामोत्सव” थीम पर केंद्रित रहा। मुख्यमंत्री साय और धर्मस्व एवं संस्कृति मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के मार्गदर्शन में 
प्रभु श्रीराम के वनगमन की जीवंत झांकियाँ- लोमष ऋषि प्रसंग, त्रिवेणी तट पर माता सीता द्वारा शिवलिंग पूजा, शबरी-सुग्रीव प्रसंग, मुख्य मंच पर अयोध्या राम मंदिर का प्रतीकात्मक दृश्य, लेजर शो और रामकथा ने लाखों श्रद्धालुओं और विशेषकर युवाओं को आध्यात्मिक प्रेरणा दी। यह पहला वर्ष था जब आयोजन की थीम को अंतरराष्ट्रीय ध्यान भी प्राप्त हुआ।

Rajim Kumbh Arrangement

राजिम कुंभ कल्प 2025- 54 एकड़ में भव्य 'नया मेला मैदान'
साय सरकार ने 2025 में आयोजन को और सुव्यवस्थित करने के लिए नया 54 एकड़ विस्तृत मेला परिसर विकसित कराया। इस वर्ष- मुख्य मंच, सांस्कृतिक मंच, फूड जोन, मीना बाजार, पंचकोशी धाम की भव्य झांकी, 5000 से अधिक दर्शक कुर्सियाँ, पेयजल पाइपलाइन व 53 दाल-भात केंद्र (10 रुपये भोजन) और स्वास्थ्य विभाग के प्राथमिक उपचार केंद्र ने श्रद्धालुओं को अत्यधिक सुविधा प्रदान की। इस वर्ष नीदरलैंड, जर्मनी, इटली और दक्षिण अफ्रीका सहित कई देशों से पर्यटकों ने हिस्सा लिया, जिससे राजिम कुंभ की अंतरराष्ट्रीय पहचान मजबूत हुई।

organized preparations of the Sai government

राजिम कुंभ कल्प 2026- साय सरकार की सबसे सुव्यवस्थित तैयारियां
2026 के आयोजन में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इसे छत्तीसगढ़ की “आध्यात्मिक चेतना का पर्व” बताया। इस वर्ष- उन्नत बैरिकेडिंग, उच्च गुणवत्ता वाली प्रकाश व्यवस्था, सीसीटीवी नियंत्रित सुरक्षा, मोबाइल शौचालय-पेयजल टैंकर, नियंत्रण कक्ष और अस्थायी स्वास्थ्य केंद्र जैसी व्यवस्थाओं ने मेले को अभूतपूर्व रूप से व्यवस्थित बनाया।

समापन समारोह में महत्वपूर्ण घोषणाएँ
समापन समारोह में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राजिम में स्थायी धार्मिक अवसंरचना के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए। उन्होंने सर्वसुविधायुक्त धर्मशाला निर्माण के लिए 50 लाख रुपये की घोषणा की और राजिम बैराज कार्य शीघ्र प्रारंभ करने के स्पष्ट निर्देश दिए। इन पहलों से न केवल धार्मिक सुविधाओं में वृद्धि होगी, बल्कि क्षेत्र की स्थायी और सुव्यवस्थित धार्मिक संरचना को भी मजबूत किया जा सकेगा।

Exhibitions tourism promotion

आयोजन का बदलता स्वरूप
जहाँ प्रारंभिक वर्षों में यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित था, वहीं हाल के वर्षों में इसमें लोकनृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ, आध्यात्मिक प्रवचन, विभागीय योजनाओं की प्रदर्शनी, पर्यटन प्रोत्साहन कार्यक्रम और अंतरराष्ट्रीय आगंतुकों के लिए विशेष व्यवस्थाएँ शामिल होने लगी हैं। साय सरकार ने पारंपरिक आस्था को आधुनिक प्रबंधन से जोड़कर राजिम कुंभ को एक बहुआयामी धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजन का स्वरूप प्रदान किया है, जिससे यह केवल धार्मिक महोत्सव नहीं रहकर क्षेत्रीय संस्कृति और पर्यटन को भी सशक्त बनाने वाला महत्वपूर्ण मंच बन गया है।

छत्तीसगढ़ की आध्यात्मिक पहचान को नया विस्तार
राजिम कुंभ (कल्प) आज छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर, संत परंपरा और सामाजिक समरसता का प्रतिनिधि आयोजन बन चुका है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में पवित्र त्रिवेणी संगम पर इस मेले को भव्यता, सुरक्षा, स्वच्छता और सुव्यवस्थित प्रबंधन के साथ नई पहचान मिली है। राजिम कुंभ अब केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और पर्यटन का भव्य संगम बन चुका है।

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