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रायपुर में खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के उद्घाटन में मीराबाई चानू ने एशियन गेम्स पदक को अपना सबसे बड़ा लक्ष्य बताया। वजन वर्ग बदलाव और नई चुनौतियों पर भी खुलकर बोलीं।

रायपुर। टोक्यो ओलंपिक में देश को गौरवान्वित करने वाली स्टार वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने अपने सबसे बड़े अधूरे सपने का खुलासा किया है। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के उद्घाटन समारोह में उन्होंने साफ कहा कि एशियन गेम्स में पदक जीतना ही अब उनका सबसे बड़ा लक्ष्य है। चोट और वजन वर्ग की चुनौतियों के बावजूद उनका फोकस अब पूरी तरह इसी मिशन पर है।

बता दें कि मीराबाई चानू भारत की सबसे सफल महिला वेटलिफ्टर्स में से एक हैं, जिन्होंने ओलंपिक और विश्व स्तर पर देश का नाम रोशन किया है।

एशियन गेम्स में चीन और कोरिया जैसी मजबूत प्रतिस्पर्धा के कारण यह टूर्नामेंट वेटलिफ्टर्स के लिए सबसे कठिन माना जाता है।

एशियन गेम्स पदक को बताया सर्वोच्च प्राथमिकता
मीराबाई चानू ने कहा कि एशियन गेम्स का प्रतियोगी स्तर बेहद कठिन होता है और यही इसे उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती बनाता है। उन्होंने बताया कि 2014 इंचियोन में अपने पहले एशियन गेम्स में वे नौवें स्थान पर रहीं। 2018 और 2022 में चोटों ने उन्हें इस महत्वपूर्ण टूर्नामेंट में हिस्सा लेने से रोक दिया, जिससे उनका सपना अधूरा रह गया।

टोक्यो ओलंपिक की रजत पदक विजेता मीराबाई चानू
टोक्यो ओलंपिक की रजत पदक विजेता मीराबाई चानू

वजन वर्ग बदलने की चुनौती
सबसे बड़ी कठिनाइयों में से एक अंतरराष्ट्रीय नियमों में बदलाव है, जिसके कारण उन्हें 48 किलोग्राम और 49 किलोग्राम वर्ग के बीच संतुलन बनाना होगा। वे जुलाई में होने वाले Commonwealth Games 2026 में 48 किलोग्राम वर्ग में उतरेंगी। सितंबर-अक्टूबर में जापान के नागोया में होने वाले एशियन गेम्स में उन्हें 49 किलोग्राम वर्ग में खेलना होगा। उन्होंने कहा कि, यह बदलाव शारीरिक और तकनीकी दोनों रूप से कठिन है, लेकिन लक्ष्य बड़ा है इसलिए मेहनत दोगुनी करनी होगी।

राष्ट्रीय चैंपियनशिप में बनाया रिकॉर्ड
हाल ही में राष्ट्रीय वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में उन्होंने 48 किलोग्राम वर्ग में तीन राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़े-

  • स्नैच: 89 किलोग्राम
  • क्लीन एंड जर्क: 116 किलोग्राम
  • कुल: 205 किलोग्राम

यह उनके करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन माना जा रहा है।

जनजातीय खिलाड़ियों के लिए खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स को बड़ा मंच बताया
मीराबाई चानू ने कहा कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स देश के दूरस्थ और आदिवासी इलाकों के खिलाड़ियों के लिए वरदान की तरह हैं। उन्होंने बताया कि उत्तर-पूर्व और ट्राइबल क्षेत्रों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं, लेकिन प्लेटफॉर्म की कमी रहती है। ऐसे आयोजन नए सितारों को जन्म देंगे।

उच्चस्तरीय प्रशिक्षण सुविधाओं की सराहना
उन्होंने नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (NCOE), खेलो इंडिया स्टेट सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और साई ट्रेनिंग सेंटर की सराहना करते हुए कहा कि आधुनिक सुविधाएँ, पोषण और वैज्ञानिक प्रशिक्षण भारतीय खेलों को नई ऊँचाइयों पर ले जा रहे हैं।

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