रायपुर। शासकीय दू.ब. महिला स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय, रायपुर में सात दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (FDP) सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। प्राचार्य डॉ. जया तिवारी के संरक्षण में आयोजित इस कार्यशाला में शैक्षणिक, सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और साहित्यिक दृष्टिकोणों से जेंडर समानता पर बहुआयामी विमर्श हुआ। कार्यक्रम में सैद्धांतिक जेंडर स्टडीज से लेकर उसके व्यावहारिक अनुप्रयोगों तक सभी पहलुओं पर विशेषज्ञों ने गहन चर्चा की।
जेंडर स्टडीज, पूर्वाग्रहों की पहचान और बदलाव की आवश्यकता
कार्यक्रम के दौरान सामाजिक संरचनाओं में गहरे पैठ चुके पूर्वाग्रहों को पहचानने और उनसे मुक्त होने की प्रक्रिया पर जोर दिया गया। सप्ताह भर चले विचार-विमर्श में वक्ताओं ने बताया कि जब समाज जेंडर को कठोर भूमिकाओं के बजाय एक विस्तृत मानवीय क्षमता के रूप में समझना शुरू करता है, तभी वास्तविक समानता संभव होती है।
विशेषज्ञों के विचार: लैंगिक असमानता से मुक्त समाज की दिशा में
डॉ. जे.सी. अजवानी, प्रो. नीलिमा चौहान और राकेश चतुर्वेदी जैसे विशेषज्ञों ने लैंगिक असमानता, स्त्री मुक्ति, समान अवसर और सामाजिक रूढ़ियों पर अपने दृष्टिकोण रखे। कार्यक्रम का विशेष आकर्षण LGBTQAI+ और तृतीय लिंग समुदायों से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित सत्र रहा, जिसमें विद्या राजपूत के अनुभवजनित विचारों और डॉ. जया जादवानी के साहित्यिक विश्लेषण ने प्रतिभागियों को नई समझ प्रदान की।
Gen-Z दृष्टिकोण और जेंडर का स्पेक्ट्रम मॉडल
पूर्व प्राचार्य डॉ. किरण गजपाल ने जेन-जी के नज़रिये से बदलते जेंडर-संवाद पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आधुनिक पीढ़ी जेंडर को पारंपरिक बाइनरी सीमाओं में न देखकर स्पेक्ट्रम के रूप में स्वीकार कर रही है, जो एक सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन का संकेत है।
अंतिम दिवस: ‘अनलर्निंग’ और व्यावहारिक बदलाव की दिशा में प्रेरणा
अंतिम दिन की शुरुआत दिल्ली विश्वविद्यालय के जाकिर हुसैन कॉलेज से आईं प्रो. नीलिमा चौहान के विचारोत्तेजक सत्र से हुई। उन्होंने दैनिक जीवन और कार्यस्थलों में 'अनलर्निंग' यानी सीखी हुई रूढ़ियों को भूलने के महत्व पर बल दिया। प्रो. चौहान ने कहा कि, 'सच्ची समानता तब शुरू होती है जब हम जेंडर को भूमिकाओं की सीमाओं में नहीं, बल्कि मानवीय क्षमता के विस्तृत स्पेक्ट्रम के रूप में देखते हैं।'
सफल समापन और आभार
प्राचार्य डॉ. जया तिवारी ने कार्यक्रम को सफल बनाने वाले सभी विशेषज्ञों, संयोजकों, शोधार्थियों और उपस्थित अकादमिक सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि, महाविद्यालय सामाजिक और शैक्षणिक सुधार में आगे बढ़ते रहने के लिए प्रतिबद्ध है। इस कार्यक्रम में संयोजक डॉ. रश्मि दुबे, सचिव डॉ. गौतमी भतपहरी, सदस्यगण डॉ. प्रमिला नागवंशी, डॉ. मुक्ता मल्होत्रा, डॉ. प्रतिभा साहू और एडवाइजरी समिति के डॉ. के.के. हैरिस, डॉ. रितु मारवाह, डॉ. स्वप्निल कर्महे तथा मीडिया प्रभारी डॉ. कल्पना मिश्रा एवं डॉ. आरती उपाध्याय उपस्थित रहीं।