रायपुर। राज्य के वन विभाग के अफसर कांगेर वैली में ग्रीन गुफा को आम पर्यटकों के लिए खोलने जी जान से जुटे हुए हैं। ग्रीन गुफा को आम पर्यटकों के लिए खोले जाने के खिलाफ पर्यवरण प्रेमियों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। वन विभाग के अधिकारियों ने ग्रीन गुफा को आम पर्यटकों के लिए खोलने हाईकोर्ट में शपथ पत्र के साथ एंबिएंस साइंस की नेशनल केव रिसर्च एंड प्रोटेक्शन आर्गेनाइजेशन इंडिया की रिपोर्ट पेश की है। एंबिएंस साइंस की रिपोर्ट में कोटमसार को लेकर टिप्पणी की गई है। इसमें उल्लेख किया गया है कि कोटमसर को वन विभाग के अफसरों ने पैसा कमाने के लिए शो केव बना दिया है।
हाईकोर्ट में पेश एंबिएंस साइंस की रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि कांगेर वैली नेशनल पार्क में कई खूबसूरत गुफाएं हैं। मध्यप्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद ये गुफाएं टूरिस्ट के लिए खास जगह बन गई हैं और उनमें से कुछ को टूरिस्ट के लिए शो केव में बदल दिया गया है, जिससे बहुत ज़्यादा कमाई होती है। बदकिस्मती से, गुफा के अंदर इंसानों के बढ़ते दबाव ने न सिर्फ इसके ईको सिस्टम को खराब किया है, बल्कि इसकी बायोडायवर्सिटी को भी खत्म कर दिया है।
पानी आने के रास्ते को किया बंद
बारिश के दिनों में ग्रीन गुफा के अंदर तेजी से पानी अंदर घुसता है। एंबिएंस साइंस की रिपोर्ट के अनुसार वन विभाग के अफसरों ने ग्रीन गुफा के पास एक वेलकम गेट बनाया है और उसके बेस पर दो सीमेंट कंक्रीट की सीढ़ियां बनाई हैं। यह स्ट्रक्चर (सीढ़ियां) गुफा में बारिश के पानी के नैचुरल फ्लो को रोकेगा। ऐसा इसलिए किया गया है, ताकि बारिश का पानी गुफा में न जाए और मानसून के बाद ग्रीन केव को जल्द से जल्द विजिटर्स के लिए फिर से खोला जा सके। नैचुरल हाइड्रोलॉजिकल फ्लो में इस
कई बायोटिक कम्पोनेंट्स इस गुफा में आते हैं
रिपोर्ट्स के अनुसार ग्रीन केव में बहुत सारी बायोडायवर्सिटी है, क्योंकि इसका एंट्रेंस चौड़ा है, इसलिए कई बायोटिक कम्पोनेंट्स इस गुफा में आते हैं जो आखिर में इस गुफा के जानवरों की स्पीशीज को सपोर्ट करते हैं। कांगेर वैली नेशनल पार्क की दूसरी गुफाओं में देखी गई कुछ आम कैवर्निकोल्स स्पीशीज के अलावा। दिलचस्प बात यह है कि इस ग्रीन केव में, मेगाडर्मा लायरा की एक कॉलोनी मिली थी और यह स्पीशीज कांगेर वैली नेशनल पार्क की किसी भी गुफा में नहीं देखी गई थी। मेगाडर्मा लायरा एक मांसाहारी चमगादड़ है जो आमतौर पर दूसरे चमगादड़ों, छोटे पक्षियों, रेप्टाइल्स, मछलियों और बड़े कीड़ों का शिकार करता है। इस तरह, यह बहुत साफ है कि इस चमगादड़ को ग्रीन केव में न सिर्फ पनाह मिल रही है, बल्कि वह आसानी से अपना शिकार भी कर रहा है।
विभागीय अफसर की विरोधाभाषी रिपोर्ट
दो माह पूर्व 18 जनवरी को जब सीढ़ियों का कंस्ट्रक्शन चल रहा था तब पीसीसीएफ (मॉनिटरिंग एंड इवैल्यूएशन) कौशलेंद्र कुमार ग्रीन केव साइट का इंस्पेक्शन करने गए थे। अफसर ने अपने इंस्पेक्शन नोट में लिखा है कि उन्हें एक फॉरेस्ट गाईस ने बताया कि ग्रीन केव भालुओं का घर है। उन्होंने ग्रीन केव को उसकी नेचुरल कंडीशन में बचाने की जरूरत पर जोर दिया और कहा कि ग्रीन केव को टूरिस्ट के लिए खोलना सही नहीं होगा। इसके बाद, 29 जनवरी को अफसर ने अपनी सिफारिशें इंद्रावती टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर के साथ चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन अरुण पाण्डेय को भेजी।
वाइल्ड प्रोटेक्शन एक्ट में अपराध है
राष्ट्रीय तथा संरक्षित वनक्षेत्र में वन्यजीवों के रहवास क्षेत्र के साथ बायोडायवर्सिटी में किसी तरह की छेड़छाड़ करने के साथ ही वन्य जीव के आवास क्षेत्र में निर्माण करने पर रोक है। इस तरह के कृत्य करने पर वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट की सेक्शन 35(6) के तहत अपराध की to Se श्रेणी में आता है।