मरवाही के मगुरदा गांव में 10 लाख का पुल पहली बारिश में ही फेल हो गया। सड़क बहने से पुल बेकार, ग्रामीणों को हो रही परेशानी; निर्माण गुणवत्ता और प्रशासन पर उठे सवाल।

आकाश पवार - पेंड्रा। छत्तीसगढ़ के मरवाही ब्लॉक के मगुरदा गांव में बना एक पुल पहली ही बारिश में बेकार साबित हो गया। करीब 10 लाख रुपये की लागत से तैयार इस पुल के दोनों ओर की सड़कें पानी के बहाव में बह गईं, जिससे पुल बीच नाले में अकेला खड़ा रह गया। अब ग्रामीणों को आने-जाने के लिए लंबा और जोखिम भरा रास्ता अपनाना पड़ रहा है।

पहली बारिश में पुल की पोल खुली
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार यह पुल क्षेत्र की आवागमन समस्या को हल करने के उद्देश्य से बनाया गया था, लेकिन बारिश शुरू होते ही इसकी हकीकत सामने आ गई। पुल के दोनों तरफ की मिट्टी और सड़क बह जाने से इसका उपयोग पूरी तरह ठप हो गया है। ग्रामीणों को अब भी लंबा चक्कर लगाकर दूसरे रास्तों से गुजरना पड़ रहा है।

घटिया निर्माण और गलत प्लानिंग उजागर
ग्रामीणों का कहना है कि पुल की नींव मजबूत कंक्रीट पर नहीं, बल्कि ढीले पत्थरों के ढेर पर टिकाई गई थी। नाले के बहाव का सही आकलन भी नहीं किया गया, जिसकी वजह से तेज पानी की धार ने सड़क को बहा दिया, जबकि पुल बीच में ही “टापू” की तरह खड़ा रह गया। यह स्थिति बताती है कि निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठते हैं और तकनीकी मानकों का पालन नहीं हुआ।

ग्रामीणों की परेशानी और जोखिम भरा आवागमन
सड़क टूटने से ग्रामीणों को रोजमर्रा की आवाजाही में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कुछ तो खेतों की पगडंडियों से जान जोखिम में डालकर गुजर रहे हैं। स्कूल जाने वाले बच्चे और खेत-खलिहानों में जाने वाले किसानों के लिए यह स्थिति बेहद कठिन हो चुकी है।

जिम्मेदारी किसकी? उठने लगे सवाल
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस निर्माण कार्य की गुणवत्ता जांच किसने की और किसके निर्देश पर ऐसे घटिया काम को मंजूरी मिल गई। ग्रामीण प्रशासन से जवाब मांग रहे हैं कि आखिर उनकी गाढ़ी कमाई से बने विकास कार्यों की निगरानी कैसे होती है और इसका दोषी कौन है? मामले ने स्थानीय प्रशासन को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है और जांच की मांग तेज हो रही है।

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