सुमित बड़ाई- पखांजुर। जिन कंधों पर वनों की सुरक्षा की जिम्मेदारी है, उन्हीं की लापरवाही अब वनों पर भारी पड़ती दिख रही है। कुरेनार वन परिक्षेत्र पश्चिम के अंतर्गत मुख्य सड़क किनारे वन विभाग द्वारा किए गए प्लांटेशन में लगे सागौन के बड़े-बड़े पेड़ों पर दिनदहाड़े कुल्हाड़ी चलती रही, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारी कुम्भकरणीय नींद में सोए रहे।
स्थानीय लोगों के अनुसार, सड़क किनारे लगाए गए सागौन के परिपक्व पेड़ों की खुलेआम कटाई की गई। हैरानी की बात यह है कि, यह कोई पहली घटना नहीं है। करीब दो साल पहले इसी इलाके में लगभग 5 एकड़ जंगल की सफाई कर खेत बना दिए गए थे, लेकिन तब भी किसी ठोस कार्रवाई की खबर सामने नहीं आई।
लगातार हरे-भरे पेड़ों की हो रही कटाई
वन माफियाओं की हिम्मत इतनी बढ़ चुकी है कि, खेत निकालने के नाम पर हरे-भरे पेड़ों को लगातार काटा जा रहा है। वहीं, वन विभाग की कार्रवाई अक्सर अंतिम समय की औपचारिकता तक सीमित रहती है। कभी-कभार लकड़ी जब्त कर ली जाती है और कार्रवाई के नाम पर सिर्फ पीआर (प्रकरण) दर्ज कर जिम्मेदारी पूरी मान ली जाती है।
विभाग को खबर न यह समझ ही नहीं
वन विभाग के अधिकारियों के बयानों से भी यह सवाल उठता है कि, क्या माफियाओं पर कोई अदृश्य मेहरबानी है? आखिर मुख्य सड़क किनारे प्लांटेशन में दिनदहाड़े कटाई होती रहे और विभाग को कानों-कान खबर न हो, यह कैसे संभव है? अब देखना यह होगा कि, उच्च अधिकारी ऐसे जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारी पर क्या एक्शन लेते है या फिर लीपापोती जैसे कार्रवाई तक सीमित हो जाता है और आगे भी इसी प्रकार बेखौफ पेड़ो की बलि चढ़ाया जाता है।
