ब्रेनडेड मरीजों के अंगों से बीमार मरीजों को नया जीवन देने का अभियान राज्य में सुस्त हो गया है।

विकास शर्मा- रायपुर। ब्रेनडेड मरीजों के अंगों से बीमार मरीजों को नया जीवन देने का अभियान राज्य में सुस्त हो गया है। सबसे निराशाजनक बात यह है कि इसके लिए गठित संचालन और सुपरवाइजरी कमेटी के गठन के सालभर बाद भी इसकी एक भी बैठक नहीं हुई है। इसके अलावा इस अभियान को पूरा करने गठित राज्य अंग एवं उतक प्राधिकरण जरूरी फंड और मानव संसाधन की कमी से जूझ रहा है। राज्य में अंगदान देने वाले दानवीरों को गार्ड ऑफ ऑनर और संबंधित परिवार को सम्मान देने की योजना ठंडे बस्ते में चली गई है। केरल में दस माह की बच्ची के अंगों से पांच बच्चों को नया जीवन मिलने का मामला सामने आने के बाद एक बार फिर राज्य में कैडेवर डोनेशन के ठंडा पड़ चुके अभियान की चर्चा होने लगी है। 

राज्य में पिछले साल अगस्त में दुर्ग जिले में ब्रेनडेड डॉक्टर के अंगों के दान के बाद यहां कोई मामला सामने नहीं आया है। इसकी प्रमुख वजह विभागीय स्तर पर इसके प्रति दिलचस्पी नहीं दिखाना है। इसके लिए राज्य अंग एवं उतक प्राधिकरण (सोटो) का गठन किया गया था, जिसके संचालक का पद तीन महीने से खाली है। अभी उपसंचालक और मीडिया कंसलटेंट ही सोटो की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। विभागीय उदासीनता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है, सुपरवाइजरी कमेटी, एडवाइजरी कमेटी के गठन के सालभर बाद भी एक बैठक भी नहीं हुई, जबकि लाइव डोनेशन के लिए गठित एडवाइजरी कमेटी हर महीने बैठक कर किडनी ट्रांसप्लांट की अनुमति अस्पतालों को दे रही है। सोटो के पास डीके अस्पताल भवन में ऑफिस तो है, मगर इस अभियान के प्रति लोगों को जागरूक करने तथा अन्य कार्यों के लिए जरूरी फंड का अभाव है। अपने अंगों के जरिए दूसरे को जीवन देने वालों को अंतिम समय में गार्ड ऑफ ऑनर देने की योजना बनाई गई थी। संबंधित परिवारों को स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर जिला स्तर पर सम्मानित करने की योजना बनाई गई थी, जो अब तक ठंडे बस्ते में है।

तीन साल में 12 अंगदान, ब्रेनडेड कई
राज्य में पहला कैडेवर डोनेशन नवंबर 2022 को हुआ था। इसके बाद बीते तीन साल में यह आंकड़ा दर्जनभर तक पहुंचा। इस अवधि में राज्य के विभिन्न अस्पतालों में ब्रेनडेड के दर्जनों मामले सामने आए। कुछ मामले तो ऐसे भी रहे जिनमें परिवार वाले रिश्तेदारों के अंगों का दान करने के लिए तैयार थे मगर सही समय में यह प्रक्रिया पूरी नहीं की जा सकी और सोटो में पंजीयन के कराने वालों का इंतजार खत्म नहीं हुआ।

इनका इंतजार अभी बाकी
राज्य अंग एवं उतक प्राधिकरण के पास वर्तमान में किडनी के जरूरतमंदों के 195, लिवर के 25 तथा अन्य अंगों के 2 आवेदन पेडिंग है। यहां हार्ट ट्रांसप्लांट के लिए कुछ अस्पतालों ने पंजीयन तो कराया है मगर अब तक इस तरह की स्थिति नहीं बन पाई है। एम्स को छोड़कर राज्य में एक भी सरकारी अस्पताल इस योजना में शामिल नहीं है। निजी अस्पतालों में अंगदान महादान की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।