गोरेलाल सिन्हा- गरियाबंद। सुपेबेड़ा को अब तक छत्तीसगढ़ भूला नहीं है। वहां किडनी की बीमारी से 133 लोगों की मौत हो चुकी है। अब फिंगेश्वर क्षेत्र का पथरी गांव भी इस गंभीर संकट की चपेट में आ गया है। सुपेबेड़ा के बाद पथरी में बीते दो वर्षों में गांव में 7 लोगों की मौत किडनी बीमारी से हो चुकी है, जबकि वर्तमान में 8 से अधिक लोग इस बीमारी से जूझ रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि, विश्वकर्मा परिवार में दो वर्ष पहले बेटे और बहू की मौत किडनी बीमारी से हो गई थी। वहीं एक साहू परिवार में बीते दौरान एक ही घर के तीन सदस्यों की मौत हो चुकी है। लगातार हो रही इन मौतों ने पूरे गांव को दहशत में डाल दिया है और लोग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। हाल यह है कि गांव की मितानिन खुद इस संकट से जूझ रही हैं। उनके पति किडनी बीमारी से पीड़ित हैं और नियमि तडायलीसिस पर निर्भर हैं। वह अपने पति को हर बार इलाज के लिए महासमुंद अस्पताल लेकर जाती हैं, जो ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को उजागर करता है।
पानी में फ्लोराइड की मात्रा अधिक
ग्रामीणों के मुताबिक, बीमारी के पीछे दूषित पेयजल सबसे बड़ा कारण हो सकता है। जल परीक्षण में कई जगहों पर आयरन और फ्लोराइड की अधिक मात्रा पाई गई है, जो किडनी पर गंभीर असर डाल सकती है। इसके बावजूद गांव में शुद्ध पेयजल की स्थायी व्यवस्था अब तक नहीं हो सकी है, जिससे लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
पिछले 15 वर्षों में 133 से अधिक लोगों की किडनी बीमारी से हो चुकी है मौत
पथरी की यह स्थिति इसलिए भी गंभीर मानी जा रही है क्योंकि सुपेबेड़ा गांव का उदाहरण पहले से सामने है, जहां पिछले 15 वर्षों में 133 से अधिक लोगों की मौत किडनी बीमारी से हो चुकी है। यह मुद्दा विधानसभा से लेकर लोकसभा तक गूंज चुका है, लेकिन समाधान अब भी अधूरा है। अब पथरी में उभरती तस्वीर उसी त्रासदी की पुनरावृत्ति की आशंका जता रही है।
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