गाइडलाइन दरों में संशोधन के बाद अब रजिस्ट्री तेज हो सकती है। वित्तीय वर्ष के अंतिम माह पर दांव टिका है।

रायपुर। छत्तीसगढ़ में राज्य सरकार ने जमीन-जायदाद के दस्तावेज की रजिस्ट्री की गाइडलाइन दरों में पुनरीक्षण किया था, इसका असर ये हुआ कि पंजीयन शुल्क बढ़ने से लोग बिदक गए। यही कारण रहा कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में सरकार को मिलने वाले राजस्व में पिछले साल के मुकाबले 4.10 प्रतिशत की कमी आ गई। यही नहीं, पंजीकृत दस्तावेजों की संख्या भी 10.20 प्रतिशत कम हो गई। यह स्थिति 1 अप्रैल 2025 से 31 दिसंबर 2025 के बीच रही, लेकिन अब पंजीयन से जुड़े लोगों के कहना है, वित्तीय वर्ष के अंतिम माह मार्च में रजिस्ट्री से राजस्व की कमी पूरी हो सकती है।

राज्य सरकार ने करीब सात साल के अंतराल के बाद गाइडलाइन दरों में यह कहते हुए बदलाव किया था कि छत्तीसगढ़ में वर्ष 2025-26 में वर्ष 2018-19 की प्रचलित गाइडलाइन दरें प्रभावशील होने से व्यावसायिक दृष्टि से असमानता की स्थिति निर्मित हो गई थी। विगत 7 8 वर्ष से अचल संपत्ति की दरों में कोई भी परिवर्तन नहीं हुआ था, इस दौरान संपत्ति की बाजार कीमत, विकास की गतिविधियां, भूमियों के उपयोग की प्रकृति, नगरीय सीमाओं में बहुत परिवर्ततन होने से खुले बाजार में जमीनों के दाम कई गुना अधिक बढ़ चुके हैं।

अब मार्च का भरोसा
पंजीयन विभाग के सूत्रों की मानें तो अभी इस वित्तीय वर्ष में पूरा एक महीना बाकी है। इस अवधि में रजिस्ट्री की संख्या बढ़ने से राजस्व आय और पंजीकृत दस्तावेज की संख्या में इजाफा हो सकता है। वजह ये है कि नई गाइडलाइन में जो वृद्धि की गई थी तथा नए प्रावधान जोड़े गए थे, उसमें व्यापक सुधार कर लिया गया है। इसलिए ये संभावना है कि पंजीयन विभाग को अब तक हुए राजस्व में घाटे की कमी पूरी हो जाएगी। हालांकि जनवरी 2026 से लेकर फरवरी तक हुए पंजीयन की जानकारी इसमें शामिल नहीं है।

राशि कच्चे में लेन-देन होने की संभावनाएं प्रबल हो गई थीं
गाइडलाइन दर स्थिर रहने से मार्केट रेट और गाइडलाइन रेट के बीच ज्यादा फासला होने से वास्तविक प्रतिफल राशि को छिपाया जाकर अंतर की राशि कच्चे में लेन-देन होने की संभावनाएं प्रबल हो गई थीं। साथ ही ग्रामीण क्षेत्र में हेक्टेयर दर के साथ ही 500 वर्गमीटर के भूखंड के लिए अलग से वर्गमीटर में दरें निर्धारित थीं, जो कि हेक्टेयर दर की तुलना में 5 से 10 गुना तक अधिक थीं। इसलिए अधिग्रहण में अधिक मुआवजे का लाभलेने के लिए बड़े रकबा का छोटे टुकड़ों में बटांकन कर लिया जाता था।

इन कारणों से गाइडलाइन दरों का पुनरीक्षण किया जाना आवश्यक बताया गया था, इसे देखते हुए पूर्व विसंगतिपूर्ण दरों का सुधार तथा अनावश्यक कंडिकाओं का युक्तियुक्तकरण करते हुए 20 नवंबर 2025 से गाइडलाइन दरों का पुनरीक्षण किया जाकर अचल संपत्ति के मूल्यांकन हेतु नवीन गाइडलाइन दरें प्रभावशील की गई थीं। 

एक नजर राजस्व और दस्तावेज पंजीयन के आंकड़ों पर
अब एक नजर डालते हैं पंजीयन से मिलने वाले राजस्व और पंजीबद्ध दस्तावेज की संख्या पर। राज्य में 2025-26 में 1 अप्रैल 2025 से लेकर 31 दिसंबर तक राजस्व के रूप में 1960.05 करोड़ रुपए मिले। जबकि पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 में यह राशि कुल मिलाकर 2978 58 करोड़ रुपए थी। इस हिसाब इस राजस्व प्राप्ति में पिछले साल के मुकाबले 4.10 प्रतिशत की कमी आई।

अब पंजीकृत दस्तावेज की संख्या देखें तो साफ होता है कि 2025-26 में 31 दिसंबर तक 2 लाख 4 हजार दस्तावेज पंजीकृत हुए। जबकि पिछले साल यह संख्या 3.21 लाख थी। इस हिसाब से यह कमी 10.20 प्रतिशत रही। खास बात ये है कि पिछले दस साल में पहली बार पंजीकृत दस्तावेज की संख्या में इतनी बड़ी कमी आई है।