गोपी कश्यप- नगरी। विकासखंड नगरी के ग्राम पंचायत सांकरा में शुक्रवार को एक नई आर्थिक क्रांति की शुरुआत हुई, जब सांकरा बांध में मखाना खेती का विधिवत शुभारंभ पूजा-अर्चना के साथ किया गया। इस ऐतिहासिक पहल के तहत स्व सहायता समूहों की महिलाओं ने उत्साहपूर्वक मखाना के बीज बोकर क्षेत्र में रोजगार और आत्मनिर्भरता की नई उम्मीद जगाई।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित जिला पंचायत अध्यक्ष अरुण सार्वा ने इस पहल को ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए मील का पत्थर बताते हुए कहा कि, सांकरा में मखाना खेती न केवल स्व सहायता समूहों की महिलाओं को स्थायी रोजगार प्रदान करेगी, बल्कि पूरे क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम साबित होगी। उन्होंने यह भी बताया कि, इस योजना से 17 स्व सहायता समूहों की लगभग 200 महिलाएं सीधे तौर पर जुड़ी हुई हैं, जिससे उनके आर्थिक सशक्तिकरण को नई गति मिलेगी।
उन्होंने जानकारी दी कि, मखाना खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्वयं के व्यय से तालाब का निर्माण कराया गया है और इस विषय को राष्ट्रीय स्तर तक ले जाने के लिए केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान को भी अनुशंसा की गई थी। धमतरी प्रवास के दौरान मंत्री को मखाना से निर्मित पुष्पमाला पहनाकर इस अभिनव पहल की जानकारी दी गई थी।
100 एकड़ क्षेत्र में मखाना खेती की जाएगी विकसित
योजना के तहत सांकरा बांध में लगभग 100 एकड़ क्षेत्र में मखाना खेती विकसित की जाएगी, जिसकी शुरुआत फिलहाल 25 से 30 एकड़ क्षेत्र में की गई है। क्षेत्र में पहली बार हो रही इस खेती को लेकर महिलाओं और ग्रामीणों में खासा उत्साह और उत्सुकता देखने को मिल रही है। ग्रामीणों का मानना है कि यह पहल आने वाले समय में सांकरा को मखाना उत्पादन का प्रमुख केंद्र बना सकती है।
कार्यक्रम में जिला पंचायत सदस्य एवं वन सभापति अजय ध्रुव, जनपद उपाध्यक्ष हृदय साहू, जनपद सदस्य राजेश नाथ गोसाई, प्रेमलता नागवंशी, सरपंच नागेंद्र बोरझा, ग्राम विकास समिति अध्यक्ष गिरवर भंडारी सहित भाजपा नगरी मंडल के पदाधिकारी सुलोचना साहू, जन्मजय साहू, सतीश साहू, जनक साहू और बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।
नए कृषि मॉडल के रूप में होगी स्थापित
स्थानीय लोगों ने इस पहल का स्वागत करते हुए इसे क्षेत्र के समग्र विकास, महिला सशक्तिकरण और रोजगार सृजन की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया है। ग्रामीणों का विश्वास है कि, मखाना खेती के माध्यम से न केवल आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि सांकरा क्षेत्र की पहचान भी एक नए कृषि मॉडल के रूप में स्थापित होगी।