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एनिश पुरी गोस्वामी-मोहला। छत्तीसगढ़ के मोहला, मानपुर जिले में जिन परिवारों के सदस्यों की हत्या नक्सलियों ने कर दी थी। उन नक्सल पीड़ित परिवारों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में नौकरी देकर कलेक्टर दर पर वेतनमान तय किया गया था। लेकिन पिछले 4 सालों में उन्हें इस दर से वेतन नहीं दिया गया। बल्कि, इन्हे दो हजार दिया जा रहा था। अब इन परिवारों के बीच एक मुश्किल सामने आकर खड़ी हो गई है। जहां स्वास्थ्य विभाग ने इन्हें लेटर जारी कर कलेक्टर दर से वेतन देने के लिए फंड नहीं है का हवाला देते हुए इन्हें मना कर दिया है।

उल्लेखनीय है कि, पिछले चार सालों से कलेक्टर दर पर नियुक्ति दिए गए नक्सल पीड़ितों को दो हजार महीना वेतन भुगतान किया जा रहा है। स्वास्थ्य अधिकारी ने कर्मचारियों को पत्र लिखकर समिति के वित्तीय संकट को सामने रख दिया है। साथ ही यह कहा है कि, उन्हें दो हजार महीना के हिसाब से ही वेतन भुगतान किया जा रहा है। 2000 से अधिक का भुगतान किया जाना स्वास्थ्य विभाग के लिए संभव नहीं है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मानपुर में संचालित जीवनदीप समिति के अंतर्गत नक्सल पीड़ित उन सभी की नियुक्तियां कलेक्टर दर पर वर्ष 2021 में दिया गया है। 

कलेक्टर दर वेतन देना नहीं है संभव 

इधर पिछले 4 सालों से संबंधितो को सिर्फ 2000 हजार के हिसाब से वेतन दिया जा रहा है। इस संबंध में ब्लॉक स्वास्थ्य अधिकारी मानपुर ने बताया कि जीवनदीप समिति में वित्तीय संकट बने रहने के कारण उन्हें प्रत्येक मांह 2000 का भुगतान किया जा रहा है। स्वास्थ्य अधिकारी के पत्र में पीड़ितों को स्पष्ट कर दिया गया है कि, जीवनदीप समिति में वित्तीय संकट को देखते हुए आप सभी को कलेक्टर दर से प्रतिमाह वेतन भुगतान किया जाना संभव नहीं है।

पीड़ितों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मानपुर में मिली है नियुक्ति

नक्सल पीड़ित सदस्य रंजीता घावडे, सनारों दुग्गा, रामसो आचला और राम बाई मंडावी को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मानपुर में शासन के नियमों अनुसार नक्सल पीड़ित के रूप में शासकीय नियुक्ति दी गई है। जिसमें तय किया गया है कि इन्हें वेतन कलेक्टर दर पर दिया जाए। लेकिन स्वास्थ्य विभाग के पास इन्हें वेतन देने के लिए फंड नहीं है।

पहले नक्सली, पीड़ितों को अब मार रहा है सिस्टम 

शासन द्वारा घोषित नक्सल पीड़ित परिवारों के लिए बनाए गए नीति नियमों का मखौल मोहला मानपुर अंबागढ़ चौकी जिले मे उड़ाया जा रहा है। 2000 के मासिक पगार में परिवार तो दूर एक व्यक्ति का गुजारा भी होना संभव नहीं है। इसके बावजूद चतुर्थ श्रेणी पद पर सेवारत इन नक्शल पीड़ित परिवारों की महिलाओं को महज दो हजार का वेतन देकर उनका मजाक उड़ाया जा रहा है। जबकि उनकी मांग है कि उन्हें कलेक्टर दर पर वेतन दिया जाए।