रायपुर। भारतीय रेलवे ने रेल यात्रा को अधिक सुरक्षित और आरामदायक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव की तैयारी पूरी कर ली है। रेलवे बोर्ड ने देशभर के सभी पुराने टू-आस्पेक्ट, दो लाइटों वाले सिग्नल सिस्टम को हटाकर आधुनिक थ्री-आस्पेक्ट, तीन लाइटों वाले सिग्नल लगाने का निर्णय लिया है। इस महत्वपूर्ण बदलाव के बाद अब लोको पायलट को काफी दूरी से ही पता चल जाएगा कि अगला सिग्नल किस स्थिति में है। इससे न केवल सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि यात्रियों को लगने वाले अचानक ब्रेक के झटकों से भी पूरी तरह निजात मिल जाएगी। 

वर्तमान में देश के कई हिस्सों में विशेष रूप से रेलवे फाटकों और छोटे स्टेशनों के पास, दशकों पुराना टू-आस्पेक्ट सिस्टम काम कर रहा है। इस व्यवस्था में केवल दो लाइटें लाल और हरी होती थीं। इस पुराने सिस्टम की सबसे बड़ी खामी यह थी कि लोको पायलट को खतरे का लाल सिग्नल का संकेत तब मिलता था, जब ट्रेन सिग्नल के बेहद करीब पहुंच जाती थी। ऐसी स्थिति में लोको पायलट को ट्रेन रोकने के लिए इमरजेंसी ब्रेक का सहारा लेना पड़ता था। रेलवे जिस आधुनिक सिस्टम को लागू कर रहा है, उसमें लाल और हरी लाइट के बीच एक 'पीली लाइट' का सुरक्षा कवच जोड़ा गया है। यह नई तकनीक किसी स्मार्ट अलर्ट की तरह काम करेगी। अग्रिम चेतावनी मिलेगी। यदि आगे का सिग्नल लाल है, तो उससे काफी पहले वाला सिग्नल स्वतः ही पीला हो जाएगा।

सभी जोनल रेलवे को कड़ा निर्देश
रेलवे बोर्ड की डिप्टी डायरेक्टर, ट्रैफिक ट्रांसपोर्टेशन श्वेता शर्मा ने इस संबंध में सभी जोनल रेलवे को कड़ा निर्देश जारी किया है। पत्र के माध्यम से कहा गया है कि जहां गेट स्टाप सिग्नल और स्टेशन डिस्टेंट सिग्नल एक साथ जुड़े हुए हैं, वहां तकनीकी विसंगतियों को तत्काल दूर किया जाए। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि जनरल रूल्स (जीआर 3.07) के तहत अब पूरे देश में सिग्नलिंग की एक जैसी और आधुनिक व्यवस्था लागू की जाएगी। जोनल अधिकारियों को ऐसे संवेदनशील स्थानों की पहचान कर काम शुरू करने को कहा गया है।

यह होगा रेलवे और यात्रियों को फायदा
अक्सर अचानक ब्रेक लगने से सो रहे यात्रियों या गलियारों में चल रहे लोगों को चोट लगने का डर रहता था। अब सफर पूरी तरह सुचारू और आरामदायक होगा। लंबी और भारी मालगाड़ियों में अचानक ब्रेक लगाना तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण होता है। एडवांस चेतावनी मिलने से दुर्घटनाओं की संभावना शून्य हो जाएगी। सर्दियों के दौरान धुंध के कारण सिग्नल दिखाई नहीं देते। यह तीन लाइटों वाला सिस्टम लोको पायलट को समय रहते सचेत कर देगा, जिससे देरी भी कम होगी। जब ट्रेन को अचानक रोककर फिर से शुरू किया जाता है, तो भारी मात्रा में बिजली या डीजल की खपत होती है। गति को धीरे-धीरे नियंत्रित करने से ऊर्जा की बचत होगी।