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रायपुर। छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री की अध्यक्षता में शासकीय मेडिकल कॉलेजों की स्वशासी सोसायटियों की बैठक हुई। इस दौरान वित्तीय सुधारों की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। अधिष्ठाता और अस्पताल अधीक्षक के अधिकार को बढ़ाने की स्वीकृति मिली। साथ ही बड़े स्वशासी सोसाइटियां, प्रबंधकारिणी समिति को 2 करोड़ रुपये तक के अनुमोदन का अधिकार देने का निर्णय लिया गया।

दरअसल, राज्य के 10 शासकीय मेडिकल कॉलेजों के स्वशासी सोसायटियों की बैठक हुई। इस दौरान मेडिकल कॉलेजों और संबद्ध अस्पतालों के वित्तीय विकेंद्रीकरण के विस्तार के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इन निर्णयों से कॉलेज स्तर पर स्वशासी सोसायटियों का सुदृढिकरण होगा।

राज्य गठन के बाद पहली बार हुआ संशोधन 

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जयसवाल ने कहा कि, मेडिकल कॉलेजों और संबद्ध अस्पतालों के लिए आवश्यक दवाइयां, उपकरणों की खरीदी मरम्मत और रख-रखाव की जरुरत पड़ती रहती है। मेडिकल कालेजों के अधिष्ठाता और अस्पताल अधीक्षकों के पास इन्हें खरीदने और मरम्मत के लिए बहुत ही सीमित शक्तियों का प्रावधान था। इसकी वजह से शासन के निर्णय पर निर्भर रहना पड़ता था। आगे उन्होंने कहा कि, ये नियम छत्तीसगढ़ राज्य गठन के पूर्व से चला आ रहा था। राज्य गठन के बाद पहली बार वित्तीय अधिकारों के नियम मे संशोधन किया जा रहा है। 

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10 लाख तक का होगा वित्तीय अधिकार 

पहले मेडिकल कॉलेजों के अधिष्ठाता और अस्पताल अधीक्षकों को 1 लाख रुपये से उपर के लघु निर्माण, मरम्मत, दवा खरीदी मंत्रालय स्तर पर फाइल भेजनी पड़ती थी। नए निर्णय से अब इनके पास 10 लाख रुपये तक का वित्तीय अधिकार होगा। इसके लिए शासन से किसी अनुमोदन की आवश्यकता नहीं होगी। उपकरणों की खरीदी और मरम्मत के लिए 1 लाख रुपये तक का वित्तीय अधिकार था जिसे अब बढ़ाकर 10 लाख रुपये करने की सहमति स्वशासी समिति की बैठक में दी गयी है। 

बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णयों पर लगी मुहर

मरीजों को मिलेगा तुरंत लाभ 

भण्डार और रिएजेंट की खरीदी के लिए 20 हजार रुपये तक की शक्तियां थी जिन्हें बढ़ाकर अधिष्ठाता और अस्पताल अधीक्षक को पूर्ण शक्तियां प्रदान करने की अनुशंसा की गयी है। इस वित्तीय विकेंद्रीकरण से  स्वाशासी समिति कार्य संपन्न बनेगी। इससे मरीजो को दवाइओं और स्वास्थ्य सुविधाओं का तुरंत लाभ मिलेगा।  

स्वशासी सोसायटियों का पुनर्गठन

राज्य के 10 शासकीय मेडिकल कॉलेजों और संबद्ध चिकित्सालयों की स्वशासी सोसायटियों का गठन कॉलेजों की स्थापना के साथ अलग- अलग समय पर हुआ है। इन सोसायटियों के लिए कोई एक निर्धारित गाइड लाइन या नियमावली का निर्धारण नहीं किया गया है। इन सोसायटियों को होने वाली आय व्यय के अनुमोदन के लिए भी कोई मानकीकरण प्रक्रिया नहीं है। इनमें एकरूपता लाने के लिए माडल स्वशासी सोसायटियों का ड्राफ्ट प्रशासकीय विभाग ने अनुमोदित कर जारी किया है। पहले सिर्फ सामान्य सभा को ही अधिकार प्राप्त थे। लेकिन नए ड्राफ्ट के अनुसार सामान्य सभा के अधिकारों का विस्तार करते हुए प्रबंधकारिणी समिति और वित्त समिति के अधिकारों में बदलाव किए गए हैं। 

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प्रबंधकारिणी समिति को 5 करोड़ रुपये तक के अनुमोदन का अधिकार 

इन बदलावों के अनुसार सामान्य सभा को पूर्ण अधिकार के साथ ही अब प्रबंधकारिणी समिति को प्रति काम 2 करोड़ रुपये तक अनुमोदन का अधिकार होगा।पहले ये अधिकार नहीं था। वित्त समिति को प्रति कार्य 10 लाख रुपये तक के अनुमोदन का अधिकार दिया गया है, पहले कोई अधिकार नहीं था। केंद्र अथवा राज्य शासन के विभिन्न योजनाओं से स्वशासी समिति को प्राप्त राशि, आवंटन अथवा अनुदान में से सामान्य सभा को खर्च व अनुमोदन का पूर्ण अधिकार होगा वहीं इसी राशि में से प्रबंधकारिणी समिति को 5 करोड़ रुपये तक की राशि के अनुमोदन का अधिकार होगा। 

45 % तक बढ़ाया गया क्लेम 

अभी तक राज्य शासन से आयुष्मान भारत योजना अंतर्गत प्राप्त क्लेम का 25 % ही संबंधित मेडिकल कॉलेज की स्वशासी सोसायटी को प्राप्त होता था। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की उपस्थिति में इसे बढ़ाकर 45 % कर दिया गया है।  इसके साथ ही शासकीय मेडिकल कॉलेज और सम्बद्ध चिकित्सालयों को राज्य बजट से दवाइयां मद, भण्डार और रिएजेंट मद में प्राप्त बजट का 10 फीसदी राशि का आवंटन होता था। इसे बढ़ाकर 25 फीसदी कर दिया गया है।