रायपुर। छत्तीसगढ़ में जनगणना 2027 को लेकर तैयारियां निर्णायक चरण पर पहुंच गई हैं। गृह विभाग की सीधी निगरानी में राज्य सरकार ने इस महाअभियान का पूरा ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया है। रायपुर के सिविल लाइन सर्किट हाउस में आयोजित प्रेसवार्ता में अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह मनोज कुमार पिंगुआ और जनगणना कार्य निदेशक कार्तिकेय गोयल ने बताया कि राज्य में 1 से 30 मई तक मकान सूचीकरण और हाउसिंग गणना का पहला चरण चलेगा। पहली बार यह पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और स्वगणना के विकल्प के साथ होगी।
गृह विभाग ने जनगणना को राज्य की सबसे बड़ी प्रशासनिक कवायद मानते हुए इसकी कमान अपने हाथ में रखी है। राज्य स्तर से लेकर जिला और तहसील स्तर तक लगातार समीक्षा बैठकें की जा रही हैं। अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह मनोज कुमार पिंगुआ स्वयं इस अभियान की मॉनिटरिंग कर रहे हैं, ताकि कोई भी शहरी या ग्रामीण इलाका सर्वे से छूट न जाए। विभाग का जोर इस बात पर है कि आंकड़े पूरी तरह सटीक और भरोसेमंद हों, जिससे भविष्य की विकास योजनाओं के लिए मजबूत आधार तैयार हो सके।
1 मई से घर-घर पहुंचेगा प्रशासन
पहले चरण में 1 से 30 मई तक प्रगणक घर-घर जाकर मकानों और परिवारों की जानकारी जुटाएंगे। इस दौरान मकान की स्थिति, निर्माण का प्रकार, पानी-बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं, परिवार की संरचना और उपलब्ध परिसंपत्तियों से जुड़ी जानकारी दर्ज की जाएगी। गृह विभाग ने इस चरण को राज्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया है, क्योंकि यही डेटा आगे जनसंख्या गणना के दूसरे चरण की नींव बनेगा।
62 हजार से ज्यादा अधिकारी कर्मचारी मैदान पर
राज्य में इस महाअभियान को सफल बनाने के लिए गृह विभाग ने लगभग 62,500 अधिकारियों और कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई है। इसमें प्रमुख जनगणना अधिकारी, जिला स्तरीय अधिकारी, चार्ज अधिकारी, मास्टर ट्रेनर्स, प्रगणक और पर्यवेक्षक शामिल हैं। यह पूरा अमला 33 जिलों, नगरीय निकायों और गांवों तक पहुंचकर सुनिश्चित करेगा कि हर घर की जानकारी समय पर दर्ज हो।
पहली बार डिजिटल जनगणना और स्व गणना
इस बार जनगणना की सबसे बड़ी खासियत इसका डिजिटल स्वरूप है। नागरिक 16 से 30 अप्रैल तक ऑनलाइन पोर्टल पर स्वयं अपनी जानकारी भर सकेंगे. जानकारी दर्ज करने के बाद एक सेल्फ एन्यूमरेशन आईडी जनरेट होगी, जिसे घर आने वाले प्रगणक को दिखाना होगा। प्रगणक की पुष्टि के बाद ही रिकॉर्ड अंतिम रूप से सुरक्षित होगा। गृह विभाग का मानना है कि इस व्यवस्था से डेटा संग्रह की गति बढ़ेगी और त्रुटियों की संभावना कम होगी।
33 जिलों से 19,978 गांव तक माइक्रो प्लानिंग
गृह विभाग ने जनगणना के पहले चरण के लिए राज्य भर में माइक्रो प्लानिंग की है। यह अभियान 33 जिलों, 195 नगरीय निकायों, 252 तहसीलों और 19,978 गांवों में संचालित होगा। इसके लिए लगभग 49 हजार मकान सूचीकरण ब्लॉक बनाए गए हैं। इन ब्लॉकों के जरिए प्रगणकों की जिम्मेदारी तय की गई है, ताकि कोई भी घर या परिवार सर्वे से बाहर न रहे।
गोपनीयता पर गृह विभाग का भरोसा
प्रेस वार्ता में गृह विभाग ने साफ किया कि नागरिकों द्वारा दी गई हर जानकारी जनगणना अधिनियम 1948 के तहत पूरी तरह गोपनीय रहेगी। इन आंकड़ों का उपयोग केवल विकास योजनाओं, संसाधनों के वितरण और नीति निर्माण के लिए किया जाएगा। इनकम टैक्स, पुलिस या किसी जांच एजेंसी के साथ इसे साझा नहीं किया जाएगा। इस भरोसे के जरिए सरकार लोगों की भागीदारी बढ़ाने की कोशिश कर रही है। जनगणना के लिए हर नागरिक को जानकारी देना अनिवार्य होगा। जानकारी न देने पर कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
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