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रायपुर। रायगढ़ लोकसभा सीट वह सीट है, जहां से 2019 का चुनाव विष्णुदेव साय ने जीता था। वे 2014 में भी यह सीट जीते थे। इस चुनाव के बाद वे केंद्रीय मंत्री भी रहे। इसके बाद 2023 के विधानसभा चुनाव में श्री साय यहां से लड़े और चुनाव जीतकर राज्य के मुख्यमंत्री बने हैं। इस लिहाज से देखा जाए तो यह सीट भाजपा के लिए काफी महत्वपूर्ण है। पार्टी ने इस बार यहां से सत्यानारायण राठिया को प्रत्याशी बनाया है। 

निर्वाचन आयोग को दिए गए खर्च के हिसाब के मुताबिक उन्होंने 30 अप्रैल तक की स्थिति में 21 लाख  33 हजार 274 रुपए लगाए हैं। उनके मुकाबले कांग्रेस ने मेनका सिंह को मैदान में उतारा है। वे राज परिवार से संबंधित भी हैं। लेकिन कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में खर्च के मामले में वे भाजपा से काफी पीछे हैं। उन्होंने अब तक 5 लाख 88 हजार 225 रुपए खर्च करना बताया है।

गोंगपा-बसपा प्रत्याशी एक लाख भी नहीं खर्च कर पाए 

एसटी के लिए आरक्षित इस सीट पर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से इनोसेंट कुजूर प्रत्याशी हैं। उन्होंने केवल 38 हजार 955 रुपए खर्च किए हैं। उनके मुकाबले उतरे गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (गोंगपा) के प्रत्याशी मदन प्रसाद गोंड़ हैं। उन्होंने 83 हजार 341 रुपए खर्च किए हैं। कुल मिलाकर ये प्रत्याशी एक लाख रूपए भी नहीं लगा पाए हैं।

स्कूटी पर प्रचार, पार्टी ने नहीं दिया पैसा

रायगढ़ सीट से सर्व आदि दल के प्रत्याशी बादल एक्का है। वे पेशे से ड्रायवर है। परिवार के साथ मिलकर खेती भी करते हैं। लेकिन इस चुनाव में प्रत्याशी के तौर पर जब वे प्रचार करने निकलते हैं तो अपनी स्कूटी से किसी एक सहयोगी को लेकर जाते हैं। उसी से घूमकर लोगों से मिलते हैं। बादल एक्का अब तक नामांकन के अलावा कोई राशि खर्च नहीं कर पाए हैं। इसकी वजह उन्होंने बताया कि पार्टी ने चुनाव लड़ने के लिए पैसा देने की बात कही थी। लेकिन अब तक कोई राशि नहीं दी गई है। इसलिए वे कोई खर्च नहीं कर पा रहे हैं। यही से उदय कुमार राठिया निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं। उन्होंने अब तक नामांकन के अलावा कोई रकम खर्च नहीं की है। उदय ने बताया कि उन्होंने हमर राज पार्टी की ओर से नामांकन भरा था, लेकिन पार्टी ने बी. फार्म नहीं दिया। अब निर्दलीय लड़ रहे हैं। पैसे न होने की वजह से अब तक चुनाव प्रचार शुरू ही नहीं कर पाए हैं।