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मैनपुर। गरियाबंद के मैनपुर विकासखण्ड के पहाड़ी और बीहड़ जंगलों में बसे दर्जनभर गांव के सैकड़ों आदिवासी ग्रामीण मतदान करने 25 से 30 किलोमीटर पैदल चलकर मतदान केंद्र पहुंचे। ग्रामीण कहीं एक दिन पहले तो कहीं शुक्रवार की सुबह 5 बजे ही मतदान करने अपने छोटे छोटे दुधमुंहे बच्चों को गौद में लेकर और 80 वर्षीय बुजुर्गों के साथ पहुंच गए।
यहां पहाड़ी के ऊपर बसे ताराझर, कुर्वापानी, भालूडिग्गी, मटाल के लगभग 350 ग्रामीण पथरीली पगडंडी के सहारे बुजुर्गों को घोड़े में सवार कर किसी त्योहार में शामिल होने के लिए खुशिया मनाते मतदान करने पहुंचे। यही स्थिति ग्राम पंचायत बोईरगांव के बीहड जंगल के भीतर बसे गांव डुमरघाट के ग्रामीणों भी देखने को मिली। यहां से लगभग 130 ग्रामीण दुर्गम पहाड़ी रास्तों को तय कर सुबह 5 बजे ही लगभग 4 घंटे पैदल चलने के बाद मतदान करने बरदुला पहुंचे।
रात दो बजे निकले थे गांव से वोट डालने
डुमरघाट से मतदान करने के लिए यहां रहने वाले ग्रामीण रात करीब 2 बजे ही गांव से मतदान करने के लिए निकल गार थे। डुमरघाट से मतदान करने पैदल पहुंचे 80 वर्षीय अमरसिंह कश्यप, कमरती बाई, पलटन, बजारू राम कमार, बंशीलाल, सुखीराम, कैलाश, कुशल, बेनुराम, हीरोबाई इतवारीन, मुक्ता बाई, गोपाल कश्यप, कुशल, भक्तीराम, नंदलाल कमार, धेनुराम, गिरधारी ने बताया कि मतदान करने के लिए रात 2 बजे गांव से पैदल निकले थे। वे 05 से 06 बजे बरदुला पहुंच गए, क्योंकि गर्मी का दिन है और 80 वर्षीय बुजुर्ग से लेकर दुधमुंहे बच्चों को मो अपने साथ आचंल में लेकर मतदान करने पूरा गांव के गांव पहुंचा था।
