यशवंत गंजीर- कुरूद। छत्तीसगढ़ की शांत फिजाओं में अब एक बड़ा सियासी तूफान उठने वाला है। कांग्रेस ने केंद्र सरकार की घेराबंदी के लिए 'मनरेगा बचाओ अभियान' का बिगुल फूंक दिया है। इस राष्ट्रीय आंदोलन का 'शंखनाद' कहीं और नहीं, बल्कि धमतरी जिले के कुरूद की धरती से होने जा रहा है, जहाँ जल्द ही कांग्रेस के दिग्गज नेता राहुल गांधी और राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे हुंकार भरते नजर आएंगे।
मैदान में उतरे दीपक बैज: कुरूद में हलचल तेज
शुक्रवार को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज और महामंत्री मलकीत सिंह गेंदू ने अचानक कुरूद पहुंचकर सियासी पारा चढ़ा दिया। दोनों नेताओं ने खेल मेला मैदान से लेकर अटल बिहारी बाजपेयी स्टेडियम और नई मंडी तक का चप्पा-चप्पा छाना। मकसद साफ है- मार्च के दूसरे सप्ताह में होने वाली इस जनसभा को इतना विशाल बनाना कि इसकी गूंज दिल्ली के गलियारों तक सुनाई दे।
क्यों चुना गया कुरूद?
राजनीतिक पंडितों की मानें तो कुरूद का चयन एक सोची-समझी रणनीति है। यह क्षेत्र कृषि और ग्रामीण आबादी का गढ़ है, जहाँ मनरेगा की मजदूरी हजारों परिवारों की लाइफलाइन है। राहुल गांधी यहाँ से सीधे तौर पर उन गरीबों और मजदूरों के दिल में पैठ बनाना चाहते हैं, जो केंद्र की नीतियों से खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
मुद्दे जो सुलगाएंगे सियासत की आग
- बजट में कटौती: केंद्र पर मनरेगा का गला घोंटने का आरोप।
- मजदूरी का संकट: भुगतान में देरी और तकनीकी बाधाओं पर घेराव।
- रोजगार का अधिकार: ग्रामीणों की आजीविका को चुनावी ढाल बनाना।
पूरी फौज मुस्तैद
कांग्रेस ने कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि, यह कार्यक्रम छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक मील का पत्थर साबित होगा। हम केंद्र को मनरेगा की मूल भावना के साथ खिलवाड़ नहीं करने देंगे। तैयारियों के दौरान जिला अध्यक्ष तारणी चंद्राकर, नीलम चंद्राकर और स्थानीय ब्लॉक अध्यक्षों की फौज भी साथ रही। गांव-गांव में पीले चावल बांटकर न्योता देने की तैयारी है, ताकि भीड़ का ऐसा सैलाब उमड़े जो विरोधियों की नींद उड़ा दे।








