कमालुद्दीन अंसारी- कोरिया। हर वर्ष 8 मार्च को मनाया जाने वाला अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस महिलाओं के अधिकार, सम्मान और सशक्तिकरण का प्रतीक है। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले से महिला शक्ति, सामाजिक एकता और मातृ-शिशु स्वास्थ्य सुधार की एक प्रेरणादायक पहल सामने आई है। बैकुंठपुर विकासखंड के ग्राम आनी में स्व-सहायता समूहों की महिलाएं मिलकर कोरिया मोदक नामक पौष्टिक लड्डू तैयार कर रही हैं जो गर्भवती महिलाओं के बेहतर पोषण और स्वस्थ शिशु के जन्म में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
ज्योति महिला स्व-सहायता समूह और मां शारदा स्व-सहायता समूह की लगभग 22 महिलाएं इस पहल से जुड़ी हैं। इन महिलाओं द्वारा तैयार किए जाने वाले कोरिया मोदक रागी, सत्तू, गुड़, मूंगफली, तिल, चना, जौ और घी जैसे पौष्टिक तत्वों से बनाए जाते हैं। गर्भावस्था के पांचवें माह से लेकर प्रसव तक महिलाओं को प्रतिदिन दो लड्डू दिए जाते हैं जिससे उन्हें आयरन, प्रोटीन और ऊर्जा की पर्याप्त मात्रा मिल सके। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि प्रत्येक पात्र गर्भवती महिला तक यह पोषण पहुंचे। इस पहल का सकारात्मक असर भी सामने आया है।
कम वजन वाले शिशुओं के जन्म में आई कमी
जिले में कम वजन वाले शिशुओं के जन्म के मामलों में लगभग 57 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। जबकि 95.9 प्रतिशत नवजात शिशुओं का जन्म वजन 2.5 किलोग्राम से अधिक पाया गया है। इसके साथ ही 100 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं का प्रारंभिक एएनसी पंजीयन और संस्थागत प्रसव सुनिश्चित हुआ है। यह पहल स्थानीय संसाधनों और सामुदायिक भागीदारी के साथ कुपोषण के खिलाफ एक मजबूत मॉडल बनकर उभरी है। इस कार्य से महिलाओं को आर्थिक सशक्तिकरण भी मिला है। प्रतिदिन 7 हजार कोरिया मोदक तैयार किए जा रहे हैं और अब तक 18 लाख से अधिक लड्डू वितरित किए जा चुके हैं। इस कार्य से प्रत्येक महिला को प्रतिमाह 15000 हजार रुपए की आय हो रही है जिससे वे आत्मनिर्भर बन रही हैं।
समूह से जुड़ी महिलाओं ने साझा किये अपने अनुभव
समूह से जुड़ी महिलाये बताती हैं कि पहले उन्हें यह नहीं पता था कि छोटे-से प्रयास से समाज में इतना बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। लेकिन आज उन्हें गर्व है कि उनके बनाए लड्डू गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य को बेहतर बना रहे हैं और अलग-अलग समुदाय की महिलाएं मिलकर जब यह काम करती हैं तो केवल लड्डू ही नहीं बनते बल्कि समाज में एकता और विश्वास भी मजबूत होता है। उनका कहना है कि यह पहल महिलाओं को सम्मान और आत्मविश्वास दोनों दे रही है। आज कोरिया मोदक केवल एक पौष्टिक लड्डू नहीं बल्कि महिला सशक्तिकरण, सामाजिक सद्भाव और स्वस्थ भविष्य की दिशा में बढ़ता एक प्रेरक कदम बन चुका है।