मयंक शर्मा- कोतबा/जशपुर। धर्मनगरी कोतबा के तिलगोड़ा प्रांगण स्थित श्री श्याम मंदिर में शुक्रवार को रंगभरी फाल्गुनी एकादशी महोत्सव हर्षाेल्लास के साथ मनाया गया। इस वर्ष के आयोजन का मुख्य आकर्षण श्याम बाबा की भव्य निशान यात्रा रही। श्याम भक्तों की अगाध आस्था का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि रायगढ़ जिले के लैलूंगा से सैकड़ों भक्तों ने 18 किलोमीटर की कठिन पदयात्रा कर बाबा को निशान समर्पित किया। इस वर्ष पहली बार यात्रा में बाबा के सबसे प्रिय सूरजगढ़ निशान को शामिल किया गया था, जिसने इस आयोजन को और भी ऐतिहासिक बना दिया।
लैलूंगा से शुरू हुई 18 किलोमीटर की आस्था की डगर
शुक्रवार सुबह 10 बजे लैलूंगा के बाजार पारा स्थित राधा कृष्ण मंदिर में श्याम भक्तों का हुजूम उमड़ पड़ा। हाथों में श्याम ध्वज (निशान) उठाए भक्तों ने खाटू वाले श्याम जी के मंदिर (कोतबा) तक की 18 किलोमीटर की पैदल यात्रा शुरू की। रास्ते भर श्याम नाम का गुणगान और जयकारे गूंजते रहे। शाम 5 बजे जब यह पदयात्रा कोतबा पहुंची, तो पारंपरिक वाद्ययंत्रों, ढोल, डीजे की धुन और भारी आतिशबाजी के साथ इसका भव्य स्वागत किया गया। दर्शन के पश्चात भक्तों ने श्रद्धा-भाव से बाबा को निशान अर्पित किए।
महिलाओं और युवाओं ने बढ़-चढ़कर लिया हिस्सा
वहीं इससे पूर्व कोतबा नगर में शाम 4 बजे से ही भव्य निशान शोभायात्रा की शुरुआत हो चुकी थी। हाथों में सूरजगढ़ ध्वज और नीले, पीले, लाल व गुलाबी रंग के 101 से अधिक निशान लिए सैकड़ों महिलाओं और युवाओं ने इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। पूरा माहौल रंग-गुलाल और होली के उल्लास से सराबोर नजर आया। श्री श्याम मंदिर से निकली यह यात्रा तिलगोड़ा प्रांगण, रायगढिया चौक, बस स्टैंड, परशुराम चौक और राम मंदिर होते हुए वापस श्याम मंदिर तक गई। यात्रा में श्री श्याम जी की एक आकर्षक झांकी भी शामिल थी, जिसके सजे हुए दरबार में भक्तों ने शीश नवाया और प्रसाद ग्रहण किया।
क्या है निशान चढ़ाने का पौराणिक महत्व
महाबलिदान के प्रतीक इस निशान को चढ़ाने के पीछे गहरी पौराणिक मान्यता है। धर्म की जीत के लिए श्याम बाबा (बर्बरीक) ने भगवान श्रीकृष्ण को अपना शीश दान कर दिया था। यह निशान उसी विजय और शीश दान का प्रतीक है। यात्रा में शामिल केसरी, नीले, सफेद, लाल और पीले रंग के झंडों पर श्याम बाबा व भगवान कृष्ण के चित्र अंकित थे। इन लहराते निशानों पर विशेष रूप से नारियल और मोरपंख भी बांधे गए थे। मान्यता है कि शीश दान की स्मृति में निशान चढ़ाने से श्याम सरकार अत्यंत प्रसन्न होते हैं और भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण करते हैं।
छप्पन भोग और महाप्रसाद के साथ समापन
इस पावन अवसर पर मंदिर प्रांगण में बाबा श्याम का भव्य दरबार सजाया गया और अखंड ज्योत प्रज्वलित की गई। बाबा को छप्पन भोग अर्पित करने के बाद अखंड भंडारे (श्रीश्याम रसोई) के माध्यम से हजारों श्रद्धालुओं ने महाप्रसाद ग्रहण किया। आयोजक समिति के प्रवीण शर्मा ने बताया कि, प्रतिवर्ष होने वाला यह फाल्गुनी एकादशी महोत्सव बाबा की ही कृपा से संपन्न होता है। उनका मानना है कि इस आयोजन को कराने वाले और भक्तों को बुलाने वाले, दोनों स्वयं श्री श्याम ही हैं।