मयंक शर्मा - कोतबा/जशपुर। छत्तीसगढ़ की महत्वाकांक्षी धान खरीदी योजना में पारदर्शिता के दावों को सुरंगपानी खरीदी केंद्र में उजागर हुए बड़े फर्जीवाड़े ने पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। राजस्व विभाग, खरीदी केंद्र के प्रभारी और बिचौलियों के गठजोड़ ने न सिर्फ सरकारी खजाने को बड़ा नुकसान पहुंचाया, बल्कि पूरी प्रक्रिया- गिरदावरी, सत्यापन, पंजीयन, एग्रीस्टेक, टोकन और तौलाई पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सामने आया घोटाला इस बात का प्रमाण है कि सख्ती केवल कागजों में थी, जबकि असल खेल सिस्टम के भीतर ही चल रहा था।
कैसे उजागर हुआ फर्जीवाड़ा?
पूरा मामला तब सामने आया जब एक किसान के नाम पर चार बार टोकन जारी होने की जानकारी मीडिया तक पहुँची। जांच में पाया गया कि कई किसानों के नाम पर राजस्व रिकॉर्ड में फर्जी रकबा जोड़कर नियमों के विरुद्ध धान की खरीदी की जा रही थी। रिकॉर्ड की जांच से बड़े स्तर की हेराफेरी का खुलासा हुआ।
नाम पर फर्जी जमीन जोड़कर 875 बोरी धान खरीदा गया
जांच में सामने आया कि कार्तिक, पिता दखल साय के नाम पर राजस्व रिकॉर्ड में केवल 2.335 हेक्टेयर जमीन दर्ज है। लेकिन राजस्व विभाग और खरीदी केंद्र की मिलीभगत से 4 बड़े खसरा नंबर (134/1, 139/1, 291/8, 293) को फर्जी तरीके से जोड़कर कुल रकबा 5.516 हेक्टेयर कर दिया गया। इसी बढ़े हुए फर्जी रकबे पर 875 बोरी धान खरीदा गया, जिससे हजारों-लाखों की अवैध कमाई हुई।
रकबा भी बढाकर 365 बोरी धान खरीदा गया
भरत चौहान, पिता रामसाय चौहान के पास राजस्व अभिलेख में 1.786 हेक्टेयर सामलाती भूमि दर्ज है, जिसमें कई हिस्सेदार हैं। परंतु फर्जी एग्रीस्टेक और साठगांठ से कुल रकबा 4.239 हेक्टेयर दिखाया गया। दिलीप और गतिबाला सहित आठ हिस्सेदारों के 5 खसरा नंबर फर्जी तरीके से जोड़ दिए गए, इस रकबे पर लगभग 365 बोरी धान खरीदा गया।
टोकन जारी करने की प्रक्रिया में सबसे बड़ा खेल
नियम के अनुसार एक किसान को सीमित संख्या में टोकन मिलते हैं, परंतु यहाँ चार-चार बार टोकन जारी हुए। संदिग्ध टोकन जारी किए गए:
07 जनवरी 2026: 150 क्विंटल (375 बोरी)
23 जनवरी 2026: 246 क्विंटल (615 बोरी)- बाद में निरस्त
30 जनवरी 2026: 100 क्विंटल (250 बोरी)
05 फरवरी 2026: 100 क्विंटल (250 बोरी)
भरत चौहान ने भी 29 दिसंबर 2025 को 356 बोरी धान बेचा। और कंप्यूटर ऑपरेटर, फड़ प्रभारी और नोडल अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई।
पूरा सिस्टम सवालों के घेरे में
इस घोटाले ने धान खरीदी प्रक्रिया में पारदर्शिता और सख्त नियमों के दावों को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
बिना भौतिक सत्यापन के रकबा कैसे बढ़ गया?
पटवारी, तहसीलदार और नोडल अधिकारी को इसकी भनक क्यों नहीं लगी?
क्या पूरा सिस्टम भ्रष्टाचार में शामिल था?
ग्रामीणों का कहना है कि, यह केवल दो किसानों का मामला है। पूरी जांच हो तो दर्जनों ऐसे मामले सामने आ सकते हैं।
SDM बोले यह गंभीर विषय
पत्थलगांव के एसडीएम ऋतुराज बिसेन ने कहा कि, 'यह गंभीर विषय है। सभी किसानों और रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों पर कठोर कार्रवाई होगी।'
वहीं जशपुरनगर के डीएमओ शम्भू गुप्ता का कहना है कि, 'यह अत्यंत संवेदनशील मामला है। इसे तुरंत कलेक्टर के संज्ञान में भेजा जा रहा है। जांच के बाद सख्त कार्रवाई होगी।'
