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रायपुर। आचार्य महाश्रमण के शिष्य जैन मुनि सुधाकर के सानिध्य में शंकर नगर स्थित कम्युनिटी हॉल में तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम ने ‘सुखी परिवार में जैन वास्तु और मंत्रों की भूमिका’ पर भव्य सेमिनार का आयोजन किया। इस सेमिनार में बड़ी संख्या में समाज के लोग शामिल हुए। 

मुनि सुधाकर ने कहा- वास्तु और मंत्रों से भाग्य में बदलाव संभव है। जैन दर्शन अनेकांतवाद में विश्वास रखता है। वह निमित्त और उपादान दोनों के महत्व को स्वीकार करता है। जैन आगमों में वास्तु के संदर्भ में विस्तार से विवेचन हुआ है। वास्तु के प्राण पुरुष विश्वकर्मा को भगवान ऋषभदेव का पुत्र माना जाता है। वास्तु का संबंध दस दिशाओं और पांच तत्वों से जुड़ा है। जैन ज्योतिष की परंपरा तीर्थंकर काल से ही मानी जाती है। कल्पसूत्र से पता  चलता है कि, भगवान महावीर ने जैन गणित और ज्योतिष में विशेष कुशलता प्राप्त की थी। दिशाओं और तत्वों का संतुलन बिठाकर हम सुखी जीवन और सुखी परिवार की भावना का निर्माण कर सकते हैं। 

सेमिनार में मौजूद जैन समाज के लोग 

मंत्रों के माध्यम से व्यक्ति अपने कर्मों को भी बदल सकता है

मुनि सुधाकर ने आगे कहा, मंत्रो में अपरिमित शक्ति है। मंत्रों से रिश्तों में प्रेम और अपनत्व का संचार हो सकता है। द्वेष का भाव भी मैत्री में बदल सकता है। मंत्रों से वायुमंडल की शुद्धि होती है जिससे परिवार में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है मंत्रों के माध्यम से व्यक्ति अपने कर्मों को भी बदल सकता है। परिवार की अखंडता एकता और प्रेम के लिए पारिजनों को सामूहिक रूप से मंत्र साधना का लक्ष्य रखना चाहिए।

ये रहे मौजूद 

इस दौरान मुनि नरेश कुमार और AIG संजय शर्मा ने अपने विचार रखे। मंगलाचरण मनीष नाहर     और स्वागत तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम के अध्यक्ष तरुण नाहर, संयोजन व आभार मंत्री अरुण सिपानी ने किया। इस अवसर पर पूर्व छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट न्यायाधीश गौतम चौरडिया, IAS  जयश्री भूरा आदि मौजूद रहे।