रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 23 साल पुराने बहुचर्चित राम अवतार जग्गी हत्याकांड पर आए हाईकोर्ट के फैसले को 'स्वागत योग्य' बताया है। उन्होंने कहा कि मुख्य आरोपी होने के बाद भी निचली अदालत से बरी हो जाना न्याय प्रक्रिया के अनुरूप नहीं था, इसलिए हाईकोर्ट का निर्णय संतोषजनक है।
फैसला देर से आया, पर दुरुस्त आया: मुख्यमंत्री
CM साय ने कहा कि इस मामले में न्याय मिलने में लंबा समय जरूर लगा, लेकिन हाईकोर्ट का फैसला यह साबित करता है कि न्यायिक व्यवस्था सबके लिए समान है। उनके अनुसार फैसला देर से आया, लेकिन दुरुस्त आया।
हाईकोर्ट ने पलटा निचली अदालत का फैसला
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की डिविजन बेंच ने निचली अदालत द्वारा दिए गए बरी के फैसले को रद्द कर दिया है। उपलब्ध सबूतों के आधार पर कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।
अमित जोगी की संलिप्तता साबित- कोर्ट का निष्कर्ष
हाईकोर्ट ने कहा कि जांच और गवाहों के बयानों में स्पष्ट रूप से अमित जोगी की भूमिका सामने आती है। इसलिए उन्हें अन्य सह-आरोपियों की तरह दोषी मानते हुए कठोर दंड दिया जाना उचित है। अदालत ने कहा कि निचली अदालत का फैसला न्याय के मानकों के अनुरूप नहीं था।
23 साल बाद मिला महत्वपूर्ण न्यायिक मोड़
यह मामला 23 वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा में था। हाईकोर्ट का यह फैसला न केवल पीड़ित पक्ष के लिए महत्वपूर्ण है बल्कि छत्तीसगढ़ की राजनीति और न्यायपालिका दोनों पर बड़ा प्रभाव डालने वाला माना जा रहा है।
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