अनिल सामंत- जगदलपुर। बस्तर संभाग माहरा समाज द्वारा 14वां स्थापना दिवस जगतु महारा स्मृति दिवस के रूप में पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर कुम्हड़ाकोट में विशाल जनसभा आयोजित की गई, जिसमें बस्तर संभाग के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में समाजजन शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत प्रस्तावित जगतू प्रवेश द्वार स्थापना स्थल पर विधिवत पूजा-अर्चना के साथ हुई।
पूजा-अर्चना का अनुष्ठान धरमू माहरा के वंशज आदर्श बघेल, माटी पुजारी जगतुगुड़ा और मंगलु कश्यप पुजारी द्वारा संपन्न कराया गया। सभा में वक्ताओं ने बताया कि, जगतू महारा को जगदलपुर शहर का वास्तविक बसाहटकर्ता माना जाता है और बस्तर की आजादी के लिए हुए ऐतिहासिक भूमकाल आंदोलन में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। समाज के वीर आयतु माहरा सहित अन्य योद्धाओं ने भी अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष करते हुए बस्तर की स्वतंत्रता के लिए बलिदान दिया था।
मुख्य अतिथि के रूप में शामिल सुकमा जमींदार परिवार के सदस्य कुमार जयदेव ने हल्बी बोली में संबोधित करते हुए जगतू महारा के इतिहास और बस्तर की गौरवगाथा का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि, वर्ष 1772 में राजा दलपत देव जब शिकार के लिए इस क्षेत्र में आए थे, तब उन्होंने यहां की वीरता और विशेषताओं को देखकर इसे राजधानी बनाने का निर्णय लिया था। उन्होंने कहा कि, यह भूमि जगतू महारा और धरमू महारा की दानशीलता और त्याग की प्रतीक है, जिन्होंने राजा को यह भूमि दान में दी थी।
10-10 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान
कुमार जयदेव ने कहा कि, जगदलपुर में जगतू महारा के नाम से एक भव्य प्रवेश द्वार का निर्माण होना चाहिए, जिससे आने-जाने वालों को इस महान विभूति के इतिहास और योगदान की जानकारी मिल सके। उन्होंने बताया कि, इस विषय में विधायक किरण देव से चर्चा की गई है और उन्होंने तत्काल 10-10 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान कर कलेक्टर को आवश्यक निर्देश भी दिए हैं। उन्होंने सर्वसमाज से अपील की कि, इस द्वार का निर्माण इतना भव्य हो कि पूरे प्रदेश में इसकी मिसाल दी जाए।
धरमू महारा की प्रतिमा स्थापित करने की मांग
कार्यक्रम में संभागीय अध्यक्ष राजू बघेल ने बताया कि, समाज द्वारा केशलुर से कुम्हड़ाकोट तक बाइक रैली निकाली गई और कुम्हड़ाकोट में जगतू द्वार स्थल का पूजन किया गया। उन्होंने कहा कि, समाज के नेतृत्व में दंतेश्वरी मंदिर के सामने जगतू महारा की प्रतिमा और पीजी कॉलेज धरमपुरा में धरमू महारा की प्रतिमा स्थापित करने की मांग भी की जा रही है।
ये रहे उपस्थित
कार्यक्रम में समाज के संरक्षक बिंचेम पेंदी, राजू नाग, विनय सोना, कन्हैया सोना, पप्पू नाग, गंगाराम, सामु मौर्य, योगेश सिंह ठाकुर, सिकंदर सिंह, विवेक जैन, मानिकराम पंथ, गणेश नागवंशी, डिकेश और भुनेश्वर नाग सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे। मंच संचालन शांति नाग ने किया।
जगतू महारा की स्मृति में भव्य द्वार निर्माण की पहल
माहरा समाज द्वारा आयोजित स्मृति दिवस समारोह में जगतू महारा के इतिहास, त्याग और बस्तर के विकास में उनके योगदान को विशेष रूप से याद किया गया। समाज के नेताओं ने कहा कि जगदलपुर की पहचान जगतू महारा से जुड़ी है और आने वाली पीढ़ियों को इस गौरवशाली इतिहास से परिचित कराना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से जगदलपुर में जगतू महारा के नाम से एक भव्य प्रवेश द्वार बनाने की पहल की जा रही है।
पूरे बस्तर के गौरव का प्रतीक
इस प्रस्तावित द्वार के माध्यम से न केवल शहर की ऐतिहासिक पहचान को नया आयाम मिलेगा, बल्कि बस्तर की संस्कृति और परंपरा को भी सम्मान मिलेगा। समाज के प्रतिनिधियों ने सर्वसमाज से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि, यह केवल माहरा समाज का नहीं बल्कि पूरे बस्तर के गौरव का प्रतीक होगा।