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राजा शर्मा - डोंगरगढ़। एक ग्रामीण का मकान तोड़ दिया गया। बस यूं ही...अकारण। वार्ड पार्षद के दबंग पति को उक्त ग्रामीण का घर संभवत: खटकता था। उसने अपने पावर और पहुंच का बेजा इस्तेमाल इस गरीब को बेघर बनाने में कर डाला। यहां तक तो ठीक है, लेकिन अब उस बेघर ग्रामीण की कोई सुनने तक को तैयार नहीं है, सबसे बड़ी विडंबना हमारे सिस्टम की यही है।
दरअसल हुआ कुछ यूं है कि, राजनांदगांव जिले की धर्मनगरी के नाम से विख्यात डोंगरगढ़ नगर पालिका में आने वाले गांव बाधियाटोला में जनता के एक चुने हुए जनसेवक ने अपनी सेवा की लालसा में अधर्म का काम कर दिया। प्रकाश यादव नामक एक गरीब का मकान कहने को तो नगर पालिका ने तोड़ा, लेकिन इसके पीछे असली साजिशकर्ता वार्ड का पार्षद ही था। ऐसा उस बेघर ग्रामीण का आरोप भी है, और घटनाक्रम भी कुछ ऐसा ही इशारा दे रहे हैं। अब बेघर प्रकाश यादव प्रशासन से न्याय की गुहार लगा रहा है।
सरकारी जमीन पर ही बन गए दर्जनों पीएम आवास
बढ़ियाटोला में लगभग 50 प्रतिशत आबादी सरकारी जमीन पर कब्ज़ा कर प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ ले चुकी है। सूत्रों की माने तो बधियाटोला में कई पूंजीपति लोग आवास योजना के नियम से बाहर होने के बावजूद शासकीय भूमि को कब्ज़ा कर प्रधानमंत्री आवास का लाभ लेकर बेच चुके हैं। बारीकी से निष्पक्ष जॉच पड़ताल से अधिकारी, कर्मचारियों सहित कई तथाकथित जनप्रतिनिधि भी दोषी मिलेंगे।
पार्षद पति ने मांगे पैसे, नहीं दिए तो तुड़वा दिया मकान
पीड़ित प्रकाश यादव ने मीडिया को बताया कि, बधियाटोला वार्ड में सभी लोगों के जैसे मैंने भी शासकीय जमीन घेर रखा था। कब्ज़ा जमीन पर मकान बनाने के पहले नगर पालिका को लिखित आवेदन के माध्यम से सूचना देने के बाद मकान बनाकर रहने लगा। मकान बनने के तीन महीने बाद नगर पालिका से मुझे और 4 अन्य लोगों को नोटिस मिला। ये सब पैसा वसूली के लिए एक षड्यंत्र था। बकौल प्रकाश यादव बधियाटोला वार्ड के पार्षद के पति जयश सहारे ने यह षड्यंत्र रचा था। उसने किसी को मेरे पास भेजकर मकान ना तोड़ने के लिए रुपयों की मांग की थी। रकम पूरा ना देने पर मेरा मकान तोड़ दिया। जबकि मेरे साथ कब्जा किए हुए लोग प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ लेकर पक्के मकान मे रह रहे हैं।
तहसीलदार ने शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया
बेघर हो चुका प्रकाश यादव कहता है कि, कलेक्टर साहब ने जब मेरे विषय में डोंगरगढ़ तहसीलदार और नगर पालिका अधिकारी से जानकारी मांगी तो तहसील कार्यालय में तहसीलदार मुझपर शिकायत वापस लेने का दबाव बनाने लगा। तत्कालीन नगर पालिका अधिकारी कुलदीप झा ने मेरे विषय में लिखित पत्र दिया, जिसमे मेरा कोई पक्का मकान और कोई जगह ना होना बताया। कुछ दिन बाद नगर पालिका अधिकारी का तबादला हो गया। नया अधिकारी फिर से जांचकर मेरा पक्का मकान और जमीन होने की लिखित जानकारी ले रहे हैं। ये कैसा खेल मेरे साथ खेला जा रहा है।
बेटे के मकान को मेरा बताने पर तुले अफसर
मेरे पूछे जाने पर मेरे बेटे का मकान को मेरा बता रहे हैं। जबकि मैं अपनी पत्नी के साथ अलग रहता हूं। बधियाटोला में मैं ऐसे कई घर बता दूंगा, जिनके घर में 5 बेटे हैं तो सभी को पक्का मकान एवम् उनके पिता का पक्का मकान प्रधानमंत्री आवास का लाभ ले शासकीय भूमि पर रहते हैं। मैं तो अपने स्वयं के खर्च पर कच्चा मकान बना कर रह रहा था। मैं जितनी बातें मीडिया को बता रहा हूं उन सबका दस्तावेज मेरे पास हैं और कलेक्टर साहब के पास भी है।
बिना किसी आदेश के पार्षद पति ने तुड़वा दिया मकान और पटवारी भवन
वहीं इस पूरे मामले को लेकर तत्कालीन सीएमओ कुलदीप झा ने बताया कि, उस वार्ड में अस्पताल प्रस्तावित था। जिसकी जानकारी उन्हें पार्षद के पति जयेश सहारे ने दी थी। इसके लिए जर्जर हो चुके पटवारी भवन को तोड़ने के संबंध में एसडीएम से चर्चा मात्र हुई थी। लेकिन चर्चा को ही आदेश मानते हुए जयेश सहारे ने पटवारी भवन को तोड़ डाला। नगर पालिका की जेसीबी का उपयोग करके प्रकाश यादव के मकान को भी जयेश द्वारा ही तोड़ने की जानकारी मुझे मिली थी। चूंकि निर्माण एजेंसी आरईएस है, नगर पालिका की ओर से उस समय कोई भी आदेश इस संबंध में जारी नहीं किया गया था।
यह जांच का विषय : नपा अध्यक्ष
नगर पालिका अध्यक्ष सुदेश मेश्राम इस बारे में कहते हैं कि, ग्रामीणों की स्वास्थ सुविधा के लिए हॉस्पिटल निर्माण कराना था। वार्ड नंबर 8 बधियाटोला में स्थित पटवारी निवास को तोड़ने का आदेश आया था, लेकिन तत्कालीन मुख्य नगर पालिका अधिकारी के मौखिक आदेश पर पीछे के कुछ एरिया से प्रकाश यादव का मकान तोड़ा गया है। किसके कहने पर मुख्य नगर पालिका अधिकारी कुलदीप झा ने तोड़ने का आदेश दिया है वो ही जानें। यह जांच का विषय है।
पार्षद पति पालिका में दैवेभो कर्मी, बोला-मैंने नहीं तोड़ा मकान
वही दूसरी ओर जयेश सहारे से इस विषय में जानकारी चाही गई तो उनका कहना है कि, मैं नगर पालिका में दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी के रूप में कार्यरत हूं। मुझे कोई राय देने का देने का अधिकार नहीं है। फिर भी मैं बता दूं कि, प्रकाश यादव से मैं कभी भी कोई बातचीत नहीं किया हूं। ना ही किसी को भेजकर पैसे की मांग किया है। रही बात मकान तोड़ने की तो मैंने उनका मकान नहीं तोड़ा है।
चंद रुपयों की लालच ने गरीब को बना दिया बेघर
गरीब को बेघर करने के इस घनचक्कर में दोषी चाहे कोई भी हो, यह तो साफ समझ में आ रहा है कि, चंद रुपयों के लालच में एक गरीब बेघर कर दिया गया। जिस देश में प्रधानमंत्री स्वयं गरीबों को मकान बनवाकर देने को मिशन बनाकर चल रहे हों, वहां ऐस अफसर और उनके चाटुकारों की हरकतों से गरीब परेशान हो रहे हैं।
अब मैं कुछ अप्रिय कर बैठूंगा : पीड़ित ग्रामीण
प्रकाश यादव ने यह भी कहा कि, मेरा मकान टूट जाने के बाद सभी शासकीय दफ्तरों में लिखित शिकायत कर चुका हूं, लेकिन ये सभी मेरा मजाक बना कर रखे हैं। 6 माह से ज्यादा हो गया मैं डोंगरगढ़ से राजनांदगांव पेशी में जाकर परेशान हो चुका हूं। अब ऐसी स्थिति आ गई है कि, मैं कुछ अप्रिय घटना ना घटित कर दूं।
तहसील आफिस ने नहीं दिया मकान तोड़ने का आदेश
डोंगरगढ़ तहसीलदार मुकेश ठाकुर का कहना है कि, हमारे विभाग से मकान तोड़ने से संबंधित कोई आदेश जारी नहीं हुआ है। वो नगर पालिका वाले जानें। रही बात मुझ पर शिकायत वापस लेने का दबाव वाली बात तो वह निराधार है।
