बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण कानूनी बिंदु स्पष्ट करते हुए कहा है कि यदि गैर-कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम, 1967 (यूएपीए) के तहत जांच अवधि विस्तार की अनुमति प्रारंभिक 90 दिनों की समाप्ति से पहले दे दी जाती है, तो इसे वैधानिक समय का वैध विस्तार माना जाएगा। ऐसी स्थिति में, आरोपी 90 दिन पूरे होने अदालतों में सुनवाई रोक दी गई और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। ध्यान रहे कि इससे पहले 25 फरवरी को भी ऐसा ही धमकी भरा ईमेल मिला था, हालांकि जांच के बाद कोई संदिग्ध सामग्री नहीं मिली थी। ध्यान रहे कि इससे पहले बालोद, बेमेतरा जिला कोर्ट को भी बम से उड़ाने की धमकी मिली थी।
बता दें कि, सोमवार सुबह पहले बेमेतरा जिला न्यायालय के आधिकारिक ई-मेल पर धमकी भरा संदेश मिलने के बाद कैंपस खाली कराया गया। हाईकोर्ट में दोपहर 12.50 बजे एक मेल आधिकारिक मेल आईडी में आया। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने इलाके को घेरकर बम स्क्वॉड और डॉग स्क्वॉड से जांच की। वहीं साइबर टीम ई-मेल भेजने वाले का पता लगा रही है। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में पता लगा रही है। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है। बड़ी संख्या में पुलिस बल को मौके पर तैनात कर दिया गया। सुरक्षा के मद्देनजर कोर्ट परिसर को खाली करा लिया गया और वहां मौजूद लोगों को बाहर निकाल दिया गया। कोर्ट के आसपास के क्षेत्र में लोगों की आवाजाही पर भी रोक लगा दी गई। हालांकि जांच के बाद कुछ भी संदिग्ध नहीं मिलने पर लंच के बाद ढाई बजे से फिर सभी कोर्ट लगे और सुनवाई की गई।
आईपीसी, आर्म्स एक्ट और यूएपीए की धारा लगी
सरपंच पर आईपीसी की विभिन्न धाराओं, आर्म्स एक्ट और यूएपीए की धाराओं के तहत प्रतिबंधित नक्सली संगठनों के साथ संलिप्तता का आरोप लगाया गया था। जांच पूरी करने की प्रारंभिक 90 दिनों की वैधानिक अवधि 14 अक्टूबर, 2025 को समाप्त हो रही थी।
राज्य ने कहा-वैधानिक प्रक्रिया का किया पालन
राज्य की ओर से उप सरकारी अधिवक्ता सौम्य राय ने दलील दी कि विस्तार का आवेदन एक विस्तृत प्रगति रिपोर्ट के आधार पर दिया गया था। इसमें फरार सह-आरोपियों की गिरफ्तारी, जारी तलाशी अभियान और यूएपीए की धारा 45 के तहत आवश्यक वैधानिक मंजूरी लंबित होने का उल्लेख था।