छत्तीसगढ़ में राइस मिलरों का पिछले 2-3 वर्षों से कस्टम मिलिंग का लगभग एक हजार करोड़ रुपए से अधिक का भुगतान बकाया है।

रायपुर। छत्तीसगढ़ में राइस मिलरों का पिछले 2-3 वर्षों से कस्टम मिलिंग का लगभग एक हजार करोड़ रुपए से अधिक का भुगतान बकाया है। विलंब के कारण मिलर्स को धान की मिलिंग में परेशानी हो रही है। मजदूरों को भुगतान और परिवहन के कार्यों के लिए कई मिलर्स को आर्थिक संकट का सामना करना पड रहा है। मिलर्स की हालत खस्ता होने के कारण पुरानी बकाया राशि का जल्द भुगतान के लिए बार बार आग्रह किया जा रहा है। बिलों का भुगतान नहीं होने के कारण नई धान की मिलिंग को लेकर अनिश्चितता के हालात हैं, जिसका सीधा असर धान की मिलिंग पर पड़ सकता है। धान खरीदी पूरी होने के बाद सोसाइटियों में धान जाम होने की एक बड़ी वजह यह भी है।

प्रदेश में करीब 4 हजार मिलर्स हैं, जिनमें 32 सौ मिलर्स मिलिंग कार्य कर रहे हैं। इन मिलरों को वर्ष 2023-24 और 2024-25 के धान की मिलिंग का भुगतान नहीं किया गया है। पिछले साल के बकाये के संदर्भ में बताया गया है कि मिलर्स ने पिछले साल धान का उठाव किया था लेकिन उसका चावल अब तक एफसीआई में जमा नहीं किया गया है। कई मिलरों के पास पिछले साल का धान आज भी रखा हुआ है। चावल जमा होने के बाद ही भुगतान किया जाता है। अलबता उससे पहले साल की मिलिंग पूरी होने के बाद भुगतान रोका गया। यही वजह है कि मिलर्स परेशान हैं। दो साल से भुगतान अटकने का असर इस साल मिलिंग में पड़ सकता है। ऐसा कहा जा रहा है कि नान में जमा किए जाने वाले चावल की मात्रा पूरी होने के बाद एफसीआई का रैक न मिलने के कारण दो माह से चावल जाम पड़ा हुआ है। रैक मिलने पर पिछले साल का चावल पहले जमा किया जाएगा। उसके बाद इस साल के धान की मिलिंग की प्रक्रिया शुरू होगी।

अब तक 66 लाख टन का उठाव
प्रदेश में धान खरीदी पूरी होने के बाद मिलर्स ने अब तक 66 लाख टन से अधिक धान का उठाव किया है। धान खरीदी पूरी होने के बाद मिलरों को डीओ जारी किए जा रहे हैं। अब मिलिंग तेजी ये शुरू होगा। उसके पूर्व पिछले साल के धान की मिलिंग का प्रोग्रेस देखकर उन मिलरों का ही उठाव करने का आदेश दिया जा रहा है। राज्य सरकार ने इस बार 141 लाख टन धान की खरीदी की है।

एसोसिएशन ने शीघ्र भुगतान की मांग की
राइस मिलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष कांति लाल बोथरा ने बताया कि,  धान की मिलिंग के एवज में वर्ष 2023-24 और 2024-25 में जिन मिलरों ने मिलिंग किया था उनका करीब 1000 करोढ़ रुपए का भुगतान बाकी है। अभी भी कुछ मिलरों ने पिछले साल की मिलिंग का कार्य पूरा नहीं किया है, उनका भी भगुतान रुका हुआ है। राज्य सरकार से एसोसिएशन ने शीघ्र भुगतान करने की मांग की है। राज्य सरकार ने धान खरीदी पूरी होने के बाद भुगतान की प्रक्रिया शुरू करने का आश्वासन दिया है।

कस्टम मिलिंग दर 80 रुपए प्रति क्विंटल
छत्तीसगढ़ में खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 के लिए धान की कस्टम मिलिंग प्रोत्साहन राशि प्रति क्विंटल 80 रुपये अरवा और 40 रुपए उसना के लिए तय की गई है। यह राशि मिलर्स को धान के उठाव और चावल जमा करने के लिए दी जाती है। यह दरें धान मिलिंग की लागत, बिजली, और श्रम के आधार पर राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर निर्धारित की जाती है।

पूरे धान के निराकरण के बाद भुगतान
मिलर्स को राज्य शासन द्वारा भुगतान किए जाने की नीति में कहा गया है कि मिलर्स द्वारा उठाए गए संपूर्ण धान का निराकरण होने पर ही भुगतान किया जाता है। वर्ष 2023-24 का भुगतान धान खरीदी से पूर्व किए जाना था। पेमेंट की पूरी व्यवस्था न होने के कारण नहीं हो पाया। वहीं 2024-25 का पूरे धान का निराकरण नहीं होने के कारण इसका भुगतान नहीं हो पाया है।