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कुश अग्रवाल- पलारी। बीमार पड़िए लेकिन टाइम देखकर... क्योंकि, पलारी ब्लॉक के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में शाम होते ही ताले लग जाते हैं। इसके बाद मरीजों को इलाज के लिए मरीजों को जिला अस्पताल पलारी लेकर जाना होता है। इस दौरान मरीजों की तबीयत और बिगड़ जाती है और उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
सरकार ने यहां पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खोले हैं और यहां के ग्रामीण चिकित्सकों जिन्हें RMA कहा जाता है के साथ ही पूरा मेडिकल स्टाफ और सेटअप तैयार है। इसी तरह से पलारी ब्लॉक में कुल आठ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है ये हॉस्पिटल सिर्फ ओपीडी टाइम सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक ही खुलते हैं। पांच बजे के बाद यहां पर ताला जड़ दिया जाता है और रात में डॉक्टर भी नहीं रहते हैं। एमरजेंसी में डॉक्टर या नर्स को घर जाकर बुलाना पड़ता है। इसी वजह से बीमार मरीजों को इलाज के लिए गांव से 8-20 किलोमीटर दूर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पलारी या फिर निजी अस्पताल में ले जाया जाता है। इसी तरह गर्भवती महिलाओं को भी प्रसव पीड़ा के दौरान देर रात पलारी के उपस्वास्थ्य केंद्र या फिर जिला अस्पताल में ले कर जाना होता है। इससे मरीजों और उनके परिजनों को आर्थिक और मानसिक स्थिति का सामना करना पड़ता है।
एमबीबीएस डॉक्टर पदस्थ नहीं होने से मुसीबतें बढ़ी
वहीं इन अस्पतालों में एक भी एमबीबीएस डॉक्टर पदस्थ नहीं है, जिससे नजदीकी थाना गिधपुरी के पुलिस विभाग को भी अपराधियों के मेडिकल रिपोर्ट बनवाने या फिर देर रात होने वाले सड़क हादसे के शिकार व्यक्तियों के इलाज के लिए सिर्फ पलारी हॉस्पिटल से ही निर्भर रहना पड़ता है।
डॉक्टर्स और मेडिकल स्टाफ की कमी के कारण ये केंद्र किसी काम के नहीं
सरकार ने ग्रामीण इलाकों में करोड़ों रुपये खर्च कर आलीशान बिल्डिंग बना तो दी है लेकिन चिकत्सकों और सहयोगी स्टाफ के अभाव में ये प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र शाम 5 बजे के बाद किसी काम के नहीं हैं। खास कर देर रात आने वाले मरीजों के लिए जब तक इन अस्पतालों में 24 घंटे इलाज की सुविधा उपलब्ध नहीं होगी तब तक इसका कोई मतलब नहीं है।
