रायपुर। सहकारिता एवं उपपंजीयक सहकारी संस्थाएं रायपुर की जिम्मेदारी है कि प्रत्येक सहकारी समिति का पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा होने से पहले चुनाव कराए जाएं। नियम के अनुसार यदि कोई समिति स्वयं चुनाव नहीं कराती, तो उपपंजीयक अपने संज्ञान में लेकर अधिकारी नियुक्त करता है और 90 दिनों के भीतर चुनाव की प्रक्रिया पूरी कराई जाती है।
लेकिन रायपुर जिले में दर्जनों ऐसी सहकारी समितियां हैं, जिनका कार्यकाल समाप्त हुए कई वर्ष बीत चुके हैं। हैरानी की बात यह है कि इनमें उचित मूल्य दुकानों से जुड़ी समितियां भी शामिल हैं और कई समितियों में तो प्रमुख पदाधिकारियों की मृत्यु के बाद भी उन्हीं के नाम पर समितियां संचालित हो रही हैं।
100 से अधिक समितियों का कार्यकाल हो चुका है समाप्त
सूत्रों से पता चला है कि सहकारिता एवं उपपंजीयक सहकारी संस्थाएं रायपुर में ऐसी एक सौ से अधिक सहकारी समितियां हैं, जिनका 5 साल का कार्यकाल समाप्त हो चुका है। इनमें से कई समितियों का कार्यकाल समाप्त हुए 5 साल से अधिक भी हो चुके हैं। इसके बाद भी इन समितियों का चुनाव नहीं कराया जा रहा है। इनमें कई समितियां उचित मूल्य दुकान से संबंधित समितियां हैं, जिनमें से कई समितियों के प्रमुख लोगों की मृत्यु भी हो चुकी है। इसके बाद भी ये समितियां मृत व्यक्तियों के नाम पर संचालित हो रही हैं।
ऑडिट भी समय पर नहीं कराए जा रहे
उप पंजीयक संस्था को समितियों के वित्तीय खातों का अनिवार्य अंकेक्षण (ऑडिट) करना और उनके कार्यकलापों की जांच करना भी होता है, लेकिन इसमें भी संस्था के अधिकारियों द्वारा कोताही बरती जा रही है। ऑडिट कराने के लिए समितियों के प्रमुख हर दिन कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। सहकारी समिति के कुछ लोगों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर यह भी बताया कि ऑडिट के नाम पर संस्था के कुछ अधिकारी मोटी रकम की डिमांड कर रहे हैं। यह रकम नहीं देने पर ऑडिट को अटका कर रखे हुए हैं।
प्रस्ताव आने पर की जाती है प्रक्रिया
सहकारिता एवं उपपंजीयक सहकारी संस्थाएं रायपुर के उपायुक्त पूर्णिमा सिंह ने बताया कि, प्रस्ताव आने पर चुनाव कराने की प्रक्रिया की जाती है। इसके लिए कई फाइलें आगे बढ़ाई भी गई हैं। धान खरीदी में अफसरों की ड्यूटी लगी हुई है, इसलिए चुनाव पर फोकस कम है।
बहुत समय से नहीं हो रहे चुनाव
छत्तीसगढ़ पीडीएस संघ के अध्यक्ष नरेश बाफना ने बताया कि, समितियों के चुनाव बहुत समय से नहीं हो रहे हैं। ऑडिट के लिए भी परेशानी हो रही है। अगर जल्द ही निराकरण नहीं किया गया तो इस मामले में जिला कलेक्टर से शिकायत करेंगे।