धमतरी का बीरेतरा गांव नशा मुक्त अभियान और शिक्षा सुधार के लिए 6 बजे के बाद सख्त अनुशासन लागू कर प्रदेशभर में रोल मॉडल बन गया है।

सौम्या यादव - धमतरी। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले का बीरेतरा गांव इन दिनों राज्यभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। गांव ने वह कर दिखाया है जिसकी अपेक्षा अक्सर सरकारों से की जाती है। नशे की बढ़ती समस्या और बच्चों के कमजोर हो रहे शैक्षणिक प्रदर्शन को देखते हुए गांव के लोगों ने एक ऐतिहासिक और कड़ा फैसला लिया। 
शाम 6 बजे के बाद पूरे गांव में अनुशासन की घंटी बज जाती है। यह अनुशासन ऐसा है जिसने बच्चों की पढ़ाई को नई दिशा दी है और नशे के खिलाफ लड़ाई को ताकत।

बीरेतरा का 6 PM अनुशासन मॉडल
बीरेतरा में हर दिन 6 बजे जैसे ही शाम होती है, गांव पढ़ाई के माहौल में बदल जाता है। गांव की पंचायत और स्कूल प्रबंधन ने मिलकर यह नियम बनाया कि 6 PM के बाद कोई भी छात्र घर से बाहर नहीं दिखेगा। उल्लंघन की स्थिति में 5,000 रुपये तक का अर्थदंड तय किया गया है। इस निर्णय का असर तुरंत दिखाई देने लगा है, बच्चे घरों में बैठकर नियमित पढ़ाई करने लगे हैं और वातावरण में भी कुछ घंटों के लिए पूरी तरह शैक्षणिक शांति देखने को मिलती है।

नशे पर कड़ा वार
गांव में नशे की समस्या तेजी से बढ़ रही थी, खासकर युवा पीढ़ी इसके प्रभाव में आ रही थी। इसे रोकने के लिए पंचायत ने अत्यंत कठोर कदम उठाया। गांव की सीमा में नशा करने, रखने या बेचने पर भारी भरकम जुर्माना तय कर दिया गया।

  • नशा करने पर: 10,000 रुपये तक का जुर्माना
  • नशा बेचने पर: 50,000 रुपये तक का जुर्माना

इस नियम के बाद नशा बेचने वालों की हिम्मत टूट गई है। कई दुकानदारों ने तंबाकू और गुटखा बेचने तक से तौबा कर ली है। गांव में अब माहौल काफी हद तक स्वच्छ और सुरक्षित महसूस होने लगा है।

स्कूल-पंचायत की साझेदारी ने किया कमाल
गांव की सफलता का सबसे बड़ा कारण यह है कि स्कूल और पंचायत एक ही दिशा में काम कर रहे हैं। स्कूल प्रबंधन ने इस साल 10वीं बोर्ड में 90% और 12वीं बोर्ड में 100% रिजल्ट का लक्ष्य तय किया है। छात्रों को अनुशासित और शांत माहौल देने के बाद वे खुद भी इस लक्ष्य को पाने के लिए उत्साहित हैं। माता-पिता भी इस फैसले को गांव के भविष्य के लिए जरूरी मान रहे हैं।

प्रदेश के लिए प्रेरणादायक मॉडल
बीरेतरा गांव ने यह साबित कर दिया है कि जब समाज और सिस्टम एक साथ खड़े हो जाएं तो बड़े बदलाव मुश्किल नहीं होते। नशा मुक्त अभियान और शिक्षा सुधार की यह अनूठी पहल अब पूरे प्रदेश के लिए एक उदाहरण बन चुकी है। यदि हर गांव ऐसा संकल्प ले ले, तो नशामुक्त और शिक्षित छत्तीसगढ़ का सपना दूर नहीं।