केंद्र सरकार ने कहा है कि देश में अब केवल 6 जिले ही नक्सल प्रभावित हैं। इनमें चार जिले छत्तीसगढ़ के हैं।

गोरेलाल सिन्हा-गरियाबंद। केंद्र सरकार ने कहा है कि देश में अब केवल 6 जिले ही नक्सल प्रभावित हैं। इनमें चार जिले छत्तीसगढ़ के हैं। सुकमा, बीजापुर और नारायणपुर के साथ गरियाबंद जिला भी  इस सूची में शामिल है।  हालांकि गरियाबंद जिला अघोषित रूप से नक्सल-मुक्त हो चुका हैं।

बीते माह जनवरी में 45 लाख रुपए के इनामी 9 हार्डकोर माओवादियों ने हथियारों सहित आत्मसमर्पण किया था। इनमें 6 पुरुष और 3 महिला नक्सली शामिल थे। सभी ने रायपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक अमरेश मिश्रा के समक्ष आत्मसमर्पण किया। आत्मसमर्पण करने वालों में एसडीके और सीनापाली क्षेत्रीय समितियों के डिवीजनल सचिव, डिवीजनल समिति सदस्य और पार्टी सदस्य शामिल थे। उन्होंने एके-47, एसएलआर सहित 6 स्वचालित हथियार पुलिस को सौंपे। पुलिस अधीक्षक वेदव्रत सिरमौर ने इस संबंध में चर्चा करते हुए कहा कि जिले में सक्रिय सभी माओवादी संगठन समाप्त हो चुके है।

2006 से शुरू हुआ था लाल आतंक का दौर
साल 2006 में माओवादियों की पहली आमद के साथ ही गरियाबंद लाल आतंक के साए में आ गया था। उदंती-सीतानदी, नगरी, उदंती, एसडीके और सीनापाली जैसी पांच क्षेत्रीय समितियां यहां सक्रिय थीं। वर्षों तक चली हिंसा में कई जवान शहीद हुए और बड़ी संख्या में माओवादी भी मारे गए। वर्ष 2025 में भालूडीगी मुठभेड़ के बाद समितियों का विलय और आत्मसमर्पण प्रक्रिया तेज हुई। नवंबर 2025 में उदंती समिति के आत्मसमर्पण के बाद शेष सक्रिय माओवादी भी मुख्यधारा में लौट आए। अब तक जिले में 28 माओवादी मुठभेड़ों में मारे गए।