नगर पालिक निगम के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है, जब निगम आयुक्त को हटाने के लिए सर्वसम्मति से सत्ता और विपक्ष के पार्षदों ने आवाज उठाई।

भिलाई। छत्तीसगढ़ में नगर पालिक निगम के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है, जब निगम आयुक्त को हटाने के लिए सर्वसम्मति से सत्ता और विपक्ष के पार्षदों ने आवाज उठाई और संकल्प पत्र में नोट कर उसके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया। भिलाई नगर पालिक निगम में बजट सत्र वर्ष 2026-27 को लेकर बुधवार को विशेष समेलन हुआ। महापौर नीरज पाल ने अपने कार्यकाल का अंतिम बजट अभिभाषण से शुरू किया।इस दौरान चर्चा के दौरान विभिन्न मुद्दों को लेकर विपक्ष और सत्ता पक्ष में जमकर तकरार हुई। विपक्ष ने शिक्षा उपकर, निगम की संचित निधि, भू-भाटक राशि को दूसरे मद में खर्च करने का मुद्दा उठाते हुए निगम आयुक्त और अधिकारियों को घेरना शुरू किया। उन्होंने एमआईसी को भी इस मामले में जिम्मेदार ठहराने की भी कोशिश की।

इस दौरान विपक्ष के पार्षद पीयूष मिश्रा निगम आयुक्त राजीव पाण्डेय से लगातार पूछते रहे कि उन्होंने शिक्षा उपकर की राशि को दूसरे मद में कैसे खर्च किया, लेकिन आयुक्त ने उसका जवाब नहीं दिया। जब उन्होंने जवाब के लिए दबाव बनाया तो आयुक्त पाण्डेय ने यह कहा कि ईश्वर उनको सदबुद्धि दे। इतना सुनते ही मेयर नीरज पाल, पार्षद पीयुष मिश्रा, नेता प्रतिपक्ष भोजराज सिन्हा सहित सत्ता और विपक्ष के सभी पार्षद आयुक्त के खिलाफ हो गए और उनसे माफी मांगने की मांग करने लगे। जब आयुक्त ने माफी नहीं मांगी तो सभी पार्षदों ने मिलकर सर्वसम्मति से यह संकल्प लाया कि आयुक्त को निगम से हटाया जाए। आयुक्त के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के बाद सरकार से हटाने की मांग की जाएगी।

मेयर ने बताया दुर्भाग्यजनक स्थिति
मेयर नीरज पाल का कहना है कि ऐसा छत्तीसगढ़ के इतिहास में पहली बार हुआ है, जब सत्ता पक्ष और विपक्ष सभी ने मिलकर एक साथ आयुक्त के खिलाफ धारा 54 के तहत उनको हटाने के लिए संकल्प पत्र लाया है। उन्होंने आयुक्त द्वारा किए जा रहे भ्रष्टाचार को लेकर कहा कि प्रदेश में भाजपा सरकार है। आयुक्त प्रदेश का प्रतिनिधि है। उसके द्वारा लगातार बिना नियम के कार्य किया जा रहा है। भ्रष्टाचार को लेकर सत्ता पक्ष ने कलेक्टर से उसे हटाने और जांच कराने की मांग की है।