रायपुर। गैस एजेंसियों में कमर्शियल गैस सिलेंडरों की मारामारी अभी भी बनी हुई है। होटल, रेस्टोरेंट सहित अन्य व्यावसायिक सहित विविध कार्यक्रमों में उपयोग के लिए कमर्शियल सिलेंडर नहीं दिए जा रहे हैं, जिसके कारण नवरात्रि में भंडारा कराने वाली मंदिर समितियों की चिंता बढ़ गई है। हालांकि कई मंदिर समितियां कमर्शियल सिलेंडरों की किल्लत को देखते हुए इलेक्ट्रानिक चूल्हा या लकड़ी चूल्हा से भंडारा के लिए भोजन बनाने की तैयारियों में जुट गई हैं।
अभी नहीं पहुंची कमर्शियल सिलेंडरों की खेप
केंद्र सरकार और ऑयल कंपनियों के दिशा-निर्देश के तहत छत्तीसगढ़ में उपभोक्ताओं की खपत के अनुसार कमर्शियल गैस सिलेंडरों का 20 प्रतिशत होटल, रेस्टोरेंट सहित अन्य व्यवसाय तथा आम लोगों को प्रदान करने पर सहमति बनी है, लेकिन राजधानी रायपुर में संचालित गैस एजेंसियों में अब तक को भी आम उपभोक्ताओं को कमर्शियल गैस सिलेंडर प्रदाय नहीं किए गए। एजेंसियों में कार्यरत कर्मचारियों का यहीं कहना है कि उपभोक्ताओं को प्रदाय करने के लिए कमर्शियल गैस सिलेंडरों का स्टॉक नहीं पहुंचा है। स्टॉक आने पर ही वे प्रदाय कर पाएंगे।
घरेलू गैस सिलेंडरों की भी मारामारी, लग रही लंबी कतारें
घरेलू गैस सिलेंडर के लिए भी गैस एजेंसियों में मारामारी जारी है। बुकिंग के आधार पर ही उपभोक्ताओं को सिलेंडर दिए जा रहे हैं, लेकिन बुकिंग कराने में ही उपभोक्ताओं के पसीने छूट रहे हैं। ऑनलाइन बुकिंग नहीं होने के कारण गैस एजेंसियों के दफ्तरों में उपभोक्ताओं की लंबी कतारें लग रही हैं। ज्यादातर गैस एजेंसियों के दफ्तर में लोग खाली सिलेंडर लेकर पहुंच रहे हैं, ताकि पर्ची कटते ही वे भरा सिलेंडर ले सकें।
इलेक्ट्रानिक चूल्हा या लकड़ी से बनेगा भंडारा का भोजन
चैत्र नवरात्रि गुरुवार से प्रारंभ हो रही है। नवरात्रि में अष्टमी से जगह-जगह मंदिरों में भंडारा आयोजन का सिलसिला शुरू हो जाएगा। भंडारा के लिए भोजन बनाने के लिए गैस सिलेंडरों का उपयोग किया जाता है, लेकिन इस बार सिलेंडरों की किल्लत ने समितियों की चिंता बढ़ा रखी है। कई मंदिर समितियां तो गैस सिलेंडरों की जगह इलेक्ट्रानिक चूल्हा या फिर लकड़ी चूल्हा से भोजन कराने की तैयारियों में जुट गए हैं। टिकरापारा नंदी चौक स्थित मां काली मंदिर समिति के विकास साहू ने बताया कि सिलेंडर नहीं मिलेगा, तो लकड़ी चूल्हा से भंडारा के लिए भोजन तैयार कराएंगे।