रायपुर। आदि शक्ति के उपासकों और साधकों का पर्व चैत्र नवरात्र गुरुवार से प्रारंभ हो रहा है। माता का आगमन होने के साथ ही सनातन धर्मानुरागी हिन्दू नववर्ष का स्वागत करेंगे। भक्तों और साधकों को पहले ही दिन शुक्ल योग, ब्रह्म योग और सर्वार्थ सिद्धि योग मिल रहा है। यह विशेष योग पूजा-पाठ और साधना करने वालों के लिए उत्तम फलकारी माना जाता हैं। वहीं अधिकांश देवी मंदिरों में अभिजीत मुहूर्त यानी 1136 से दोपहर 12.24 के बीच विधि-विधान से घट स्थापना की जाएगी।
महामाया मंदिर के पुजारी एवं कथा वाचक पं. मनोज शुक्ला ने बताया कि मंदिर में माता के दरबार में चकमक पत्थर को रगड़ने से उत्पन्न होने वाले प्रकाश पुंज से ही मुख्य ज्योत प्रज्जवलित की जाएगी। इस नवरात्र के लिए मां महामाया मंदिर, दंतेश्वरी मंदिर, काली माता मंदिर सहित सभी देवी मंदिरों में भक्तों के लिए पर्याप्त व्यवस्था की गई है। पं. शुक्ला ने बताया कि वर्ष 2026 में चैत्र नवरात्रि का पर्व 19 मार्च से शुरू होने के साथ ही 27 मार्च तक मनाया जाएगा। दिनभर मिलेंगे स्थापना के लिए मुहूर्त- इस साल चैत्र नवरात्र में घट स्थापना के लिए शुभ की चौघड़िया के रूप में सुबह 6 से 7.30, उत्तम की चौघड़िया लोगों को सुबह 9 से 10.30 बजे तक मिलेगी। इसके बाद लाभ की चौघड़िया दोपहर 12 बजे शुरू होने के बाद 130 बजे तक प्रभावी होगा। इस बीच में ही 11.36 से 12.24 के बीच मिलने वाले अभिजीत मुहूर्त में अधिकांश देवी मंदिरों में घट स्थापना की तैयारी है। इसके बाद भी गृहस्थ उपासकों को अमृत का चौघड़िया दोपहर 1.31 से 3 बजे तक और इसके बाद शुभ का मुहूर्त शाम 4.30 से 6 बजे तक मिलेगा।
दिनभर मिलेंगे स्थापना के लिए मुहूर्त
इस साल चैत्र नवरात्र में घट स्थापना के लिए शुभ की चौघड़िया के रूप में सुबह 6 से 7.30, उत्तम की चौघड़िया लोगों को सुबह 9 से 10.30 बजे तक मिलेगी। इसके बाद लाभ की चौघड़िया दोपहर 12 बजे शुरू होने के बाद 1.30 बजे तक प्रभावी होगा। इस बीच में ही 11.36 से 1224 के बीच मिलने वाले अभिजीत मुहूर्त में अधिकांश देवी मंदिरों में घट स्थापना की तैयारी है। इसके बाद भी गृहस्थ उपासकों को अमृत का चौघड़िया दोपहर 1.31 से 3 बजे तक और इसके बाद शुभका मुहूर्त शाम 4.30 से 6 बजे तक मिलेगा।
तीन योग बन रहे
इस बार नवरात्र में जहां तीन योग बन रहे हैं, वहीं एक विशेष संयोग यह है कि इसमें भक्तों को तिथियों के अनुसार नौ दिन भक्ति के लिए मिलेंगे। इस बार घट स्थापना के लिए लोगों को दिनभर में कई मुहूर्त मिलेंगे। सुबह से शाम तक तय मुहूर्त में कलश स्थापित करते हुए साधक उपासना शुरू कर सकते हैं। इसके साथ ही तीन योगों का मिल रहा संयोग भक्तों के लिए सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा प्रवाहित करने वाला है।