रायपुर। छत्तीसगढ़ में व्यावसायिक परीक्षा मंडल यानी व्यापम की जगह अब कर्मचारी चयन मंडल लेगा। इसके माध्यम से राज्य में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मियों की नियुक्तियां की जाएंगी। प्रदेश सरकार ने इस बदलाव के लिए 'छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मण्डल विधेयक, 2026' बनाया है। इसके पारित होने के बाद कानून बनेगा और लागू होगा। इसके गठन पर सरकार को हर साल 30 करोड़ रुपयों का वित्तीय भार आएगा।
यह बदलाव दरअसल इसलिए किया जा रहा है, क्योंकि परीक्षाओं के लिए बनेगा एकीकृत सिस्टम। वर्तमान में अभ्यर्थियों को अलग-अलग विभागों के समान पदों के लिए अलग-अलग आवेदन करना पड़ता था, जिससे उन पर आर्थिक बोझ बढ़ता था और भर्ती प्रक्रिया में भी देर होती थी। नए विधेयक के अनुसार, अब राज्य सरकार के समस्त विभागों, वैधानिक निकायों, मण्डलों और प्राधिकरणों में सीधी भर्ती के लिए एक ही 'संयुक्त चयन प्रक्रिया अपनाई जा सकेगी।
मंडल की परीक्षा में पर नकल नहीं चलेगी
विधेयक में परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए सख्त प्रावधान किए गए हैं। मण्डल को परीक्षा प्रक्रिया में लगे सभी कार्मिकों पर पूर्ण पर्यवेक्षण और नियंत्रण का अधिकार होगा। यदि कोई अभ्यर्थी अनुचित साधनों (नकल) का प्रयोग करता है या परीक्षा में व्यवधान उत्पन्न करता है, तो मण्डल उसके विरुद्ध दंडात्मक विनियम बनाने के लिए अधिकृत होगा।
खजाने पर 30 करोड़ रुपए का भार
इस नई व्यवस्था और मण्डल के सुचारू संचालन के लिए राज्य सरकार पर प्रतिवर्ष लगभग 30 करोड़ रुपये का अनुमानित वित्तीय भार आने की संभावना जताई गई है। विधेयक में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जो भर्ती प्रक्रियाएं पहले से विज्ञापित हो चुकी हैं, वे पुरानी पद्धति से ही पूर्ण की जाएंगी।
पुराने नियम कब तक रहेंगे लागू
मंडल बनने के बाद कामकाज ठप न हो, इसके लिए एक विशेष व्यवस्था की गई है जब तक नया मण्डल अपने स्वयं के नए विनियम नहीं बना लेता, तब तक व्यापमं में पहले से चल रहे विनियम ही प्रभावी रहेंगे। यदि व्यापमं ने पहले से ही कोई विज्ञापन जारी कर दिया है, तो वह प्रक्रिया पुराने नियमों के अनुसार ही जारी रहेगी और पूरी की जाएगी। नया मण्डल अब परीक्षा प्रक्रिया में शामिल सभी अधिकारियों और कर्मचारियों पर समग्र पर्यवेक्षण, निर्देशन और नियंत्रण रखेगा । व्यापमं का वर्तमान बुनियादी ढांचा अब नए मण्डल के लक्ष्यों (जैसे संयुक्त चयन प्रक्रिया) को पूरा करने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।
मण्डल का ढांचा और संचालन
विधेयक के प्रावधानों के तहत एक उच्च स्तरीय 'कर्मचारी चयन मण्डल' का गठन किया जाएगा। मण्डल के अध्यक्ष छत्तीसगढ़ शासन के प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारी होंगे। इसमें संयुक्त सचिव स्तर के अधिकतम तीन सदस्य शामिल होंगे। उप सचिव स्तर के अधिकारी मण्डल के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी के रूप में सचिव की जिम्मेदारी संभालेंगे। वर्तमान में कार्यरत छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) के सभी अधिकारी और कर्मचारी अब नए कर्मचारी चयन मण्डल के अधीन आ जाएंगे। व्यापमं का विलय और नए मण्डल में इसके स्थानांतरण की प्रक्रिया को विधेयक के अध्याय-तीन और अध्याय-सात में स्पष्ट किया गया है। यह प्रक्रिया पूरी तरह से 'उत्तराधिकार के सिद्धांत पर आधारित है। जैसे ही राज्य सरकार राजपत्र में इस अधिनियम के लागू होने की अधिसूचना जारी करेगी, वर्तमान में अस्तित्व में रहा 'छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल' (व्यापमं) समाप्त हो जाएगा। व्यापमं अब एक पृथक इकाई के रूप में नहीं रहेगा, बल्कि इसका पूर्ण विलय 'छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मण्डल में हो जाएगा।