A PHP Error was encountered
Severity: Warning
Message: Undefined variable $summary
Filename: widgets/story.php
Line Number: 3
Backtrace:
File: /content/websites/front-hbm/application/views/themes/mobile/widgets/story.php
Line: 3
Function: _error_handler
File: /content/websites/front-hbm/application/views/themes/amp/story.php
Line: 39
Function: view
File: /content/websites/front-hbm/application/libraries/Sukant.php
Line: 507
Function: view
File: /content/websites/front-hbm/application/libraries/Sukant.php
Line: 341
Function: loadAmpTheme
File: /content/websites/front-hbm/application/controllers/Content.php
Line: 303
Function: contentStorypageAmp
File: /content/websites/front-hbm/index.php
Line: 319
Function: require_once
रायपुर। नए साल में भी प्रदेश की सीमेंट कंपनियों ने नान ट्रेड और खुले बाजार का सीमेंट 15-15 रुपए और महंगा कर दिया है। ऐसे में नान ट्रेड सीमेंट 55 रुपए और खुले बाजार का सीमेंट 35 रुपए महंगा हो गया है। दरअसल छत्तीसगढ़ की सीमेंट कंपनियां पूरी तरह से बेलगाम हो गई हैं। जब मर्जी होती है सीमेंट की कीमत बढ़ा देती हैं, जब मर्जी होती है कीमत कम कर देती हैं। प्रदेश सरकार ने दाम बढ़ाने से पहले कारण बताते हुए मंजूरी लेने के भी निर्देश दिए हैं, इसके बाद भी कंपनियां सरकार की इजाजत लिए बिना ही दाम बढ़ा दे रही हैं और फिर कम भी कर दे रही हैं।
बीते पांच माह से यही सब चल रहा है। रायपुर के सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को भी पत्र लिखकर बढ़ी कीमतों को कम कराने की मांग की है, इसके बाद भी कंपनियां लगातार दाम बढ़ाने में लगी हैं। प्रदेश की सीमेंट कंपनियां सीमेंट के दाम को लेकर खेल कर रही हैं। नवंबर में भी एक बार दाम बढ़ाए गए, इसके बाद हरिभूमि में खबर का प्रकाशन होने के बाद सरकार के एक्शन के डर से दाम कम किए गए। इसके बाद दिसंबर में फिर से खुले बाजार के सीमेंट के दाम जहां 20 रुपए बढ़ाए गए हैं, वहीं सरकारी काम में आने वाले नॉन ट्रेड सीमेंट के दाम 40 रुपए बढ़ा दिए गए हैं। अब फिर से नए साल में दाम बढ़ा दिए गए हैं।
इसे भी पढ़ें...सरप्लस धान पर फैसला : कस्टम मिलिंग से बचा हुआ धान नीलाम करेगी सरकार
दाम पर कोई अंकुश नहीं
सीमेंट कंपनियों के दाम बढ़ाने पर प्रदेश सरकार का अंकुश नहीं है। यही वजह है कि कंपनियों की जब मर्जी होती है, दाम बढ़ा देती हैं। बीते साल सितंबर में कंपनियों ने खुले बाजार के साथ ही नान ट्रेड सीमेंट के दाम 50-50 रुपए बढ़ा दिए थे। इसके बाद जहां हरिभूमि ने लगातार खबरों का प्रकाशन किया, वहीं चौतरफा राजनीतिक दबाव के बाद अंततः प्रदेश सरकार ने कंपनियों के साथ बैठक की। उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन के साथ बैठक में यह तय किया गया कि कंपनियां बढ़े हुए पूरे दाम वापस लेंगी और भविष्य में दाम बढ़ाने से पहले इसका कारण प्रदेश सरकार को बताते हुए पहले मंजूरी लेंगी।
दाम कम ज्यादा करने का खेल
सीमेंट कंपनियों ने नवंबर में प्रदेश सरकार से पूछे बिना ही माह से तीसरे सप्ताह में दाम 5 से 15 रुपए तक बढ़ा दिए। इसके बाद जब हरिभूमि में खबर का प्रकाशन किया गया तो सीमेंट कंपनियों में इसको लेकर हड़कंप मच गया कि प्रदेश सरकार उन पर एक्शन ले सकती है। ऐसे में कंपनियों ने धीरे-धीरे करके अंततः बढ़े हुए 15 रुपए दाम वापस ले लिए। इसी के साथ कंपनियों ने पहले के बढ़े हुए 50 रुपए के दाम में से जो पांच रुपए बचे थे, उसको भी वापस ले लिया। इसी के साथ नॉन ट्रेड में भी पांच से दस रुपए दाम कम किए गए। इसके बाद दिसंबर में फिर से दाम बढ़ाए गए और अब नए साल में दाम बढ़ा दिए हैं।
चिल्हर में दाम हो जाएंगे साढ़े तीन सौ
बिल्डिंग मटेरियल का काम करने वाले इस समय अलग-अलग कंपनियों का सीमेंट थोक में 60 बोरी लेने पर 295 से 320 रुपए में बेच रहे हैं। इसमें तीन रुपए प्रति बोरी अनलोडिंग का शुल्क अलग है। इसी के साथ एक टन का भाड़ा भी दो सौ रुपए लिया जाता है। अगर कोई ग्राहक चिल्हर में दो से पांच बोरी सीमेंट लेता है तो उसके घर की दूरी के हिसाब से कीमत 330 से 350 रुपए तक हो जाती है।
