पंकज गुप्ते- बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर के रतनपुर से एक बार फिर दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। बूढ़ा महादेव मंदिर तालाब में 8 कछुए मृत अवस्था में मिलने से क्षेत्र में सनसनी फैल गई है। लगातार छह दिनों के भीतर कछुओं की मौत की यह दूसरी घटना है, जिससे वन विभाग और स्थानीय प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। प्रारंभिक जांच में इनकी मौत संदिग्ध बताया जा रहा है।मिली जानकारी के अनुसार, रतनपुर स्थित बूढ़ा महादेव मंदिर के तालाब में शुक्रवार सुबह स्थानीय लोगों ने कई कछुओं को मृत देखा। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और सभी शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया गया।
खंगाले जा रहे CCTV फुटेज
प्रारंभिक रिपोर्ट में कछुओं के शरीर पर अंदरूनी चोट के संकेत मिले हैं, जिससे लाठी या किसी ठोस वस्तु से मारने की आशंका जताई जा रही है। गौरतलब है कि, इससे पहले मां महामाया मंदिर कुंड में भी दो कछुए मृत पाए गए थे। आस-पास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है और संदिग्ध गतिविधियों की जांच की जा रही है।
रतनपुर में कछुओं की मौत पर बवाल
वहीं 13 अप्रैल 2025 को रतनपुर में कछुआ कांड से बवाल मचा हुआ है। वन विभाग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर रविवार को नगर बंद किया गया था। इन दिनों कछुओं की रहस्यमयी मौत को लेकर सुर्खियों में है। दो अलग-अलग स्थानों पर मृत कछुओं की बरामदगी के बाद यह मामला धीरे-धीरे गंभीर होता जा रहा है।
रतनपुर में कछुआ कांड से बवाल मचा हुआ है। वन विभाग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर रविवार को नगर बंद किया गया। pic.twitter.com/ICQAW62mvL
— Haribhoomi (@Haribhoomi95271) April 13, 2025
कुंड से 23 मृत कछुए बरामद
यह पूरा मामला तब सामने आया, जब 25 मार्च को महामाया मंदिर परिसर स्थित कुंड से 23 मृत कछुए बरामद किए गए। इसके बाद 8 अप्रैल को मंदिर के ही पास स्थित कल्पेशरा तालाब में भी 4 कछुओं की रहस्यमयी मौत ने नगरवासियों और पर्यावरण प्रेमियों को झकझोर दिया। इन दोनों घटनाओं के बाद वन विभाग की कार्रवाई और मंदिर ट्रस्ट के रवैये पर जनता का गुस्सा भड़क गया है। लोगों का आरोप है कि विभाग ने मामले को गंभीरता से लेने के बजाय सिर्फ खानापूर्ति की।
मंदिर ट्रस्ट के एक ट्रस्टी पर पीओआर के तहत केस दर्ज
इस पूरे मामले में मंदिर ट्रस्ट के एक ट्रस्टी पर पीओआर (प्रोटेक्शन ऑफ वाइल्डलाइफ एक्ट) के तहत मामला दर्ज किया गया है। वहीं, वन विभाग ने दो मजदूरों को जेल भेज दिया है। जबकि इस मामले में कुल पांच लोगों के खिलाफ वन विभाग ने पीओआर दर्ज किया। जिसमें केवल दो लोगों की गिरफ्तारी की गई है। जबकि तीन अन्य आरोपी फरार है।
लोगों ने लगाया पक्षपातपूर्ण कार्रवाई का आरोप
नगरवासियों का कहना है कि न तो अन्य पदाधिकारियों से कोई पूछताछ हुई है, और न ही किसी से जवाब-तलब किया गया। यह पक्षपातपूर्ण कार्रवाई वन विभाग की भूमिका को संदिग्ध बना रही है।









