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पंकज गुप्ते - बिलासपुर। शिक्षा के मंदिर कहे जाने वाले स्कूलों में एक बार फिर नौनिहालों के साथ अन्याय का मामला सामने आया है। बिलासपुर के कोटा ब्लॉक की सरकारी प्राथमिक शाला पंडरापथरा में बच्चों से झाड़ू लगवाने और सफाई करवाने का वीडियो वायरल होने के बाद शिक्षा विभाग कटघरे में खड़ा हो गया है। वीडियो में छात्रों ने खुद बताया कि यह सब स्कूल में पदस्थ ‘खान मैडम’ के कहने पर किया गया।
वायरल वीडियो से खुला मामला
शुक्रवार को सामने आए वीडियो में स्कूल में पढ़ने वाली छात्राएं परिसर की सफाई करती हुई दिख रही हैं। कुछ छात्राएं झाड़ू लगा रही थीं, तो कुछ बच्चे स्कूल में फैला कचरा उठाते नजर आए। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैलते ही लोगों में आक्रोश बढ़ गया।
बच्चों का दावा- मैडम ने कहा था सफाई करने
वीडियो में मौजूद बच्चों ने बताया कि, उन्हें खान मैडम के निर्देश पर ही सफाई करने को कहा गया था। शिक्षा देने के बजाय बच्चों को झाड़ू लगवाना कई सवाल खड़े करता है कि आखिर शिक्षकों की भूमिका क्या बन गई है- शिक्षण या प्रबंधन?
बच्चे पढ़ाई छोड़ सफाई में व्यस्त
प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों को नैतिक और मूलभूत शिक्षा देने की जिम्मेदारी प्रशिक्षित शिक्षकों की होती है। लेकिन यहां स्थिति उलट दिखाई दी, बच्चे किताबों की जगह सफाई अभियान में जुटे थे। इससे न सिर्फ शिक्षा स्तर पर सवाल उठते हैं, बल्कि शिक्षकों की कार्यशैली पर भी प्रश्नचिह्न लग गया है।
शिक्षा विभाग की लापरवाही उजागर
एसी कमरों में बैठकर आदेश जारी करने वाले शिक्षा विभाग के अधिकारी शायद ही कभी मैदानी स्थितियों का जायजा लेते हैं। यही वजह है कि ऐसी घटनाएं लगातार सामने आती रहती हैं और छोटे-छोटे बच्चे स्कूलों में श्रमिकों की तरह काम करने पर मजबूर दिख जाते हैं।
जिले में कैसे सुधरेगा शिक्षा का स्तर?
जब शिक्षक अपने मूल दायित्व से हटकर बच्चों को जबरन सफाई जैसे काम सौंप रहे हैं, तो जिले में शिक्षा की गुणवत्ता कैसे बेहतर होगी? इस घटना ने पूरे तंत्र की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। अब सवाल यह है कि विभाग इस मामले में क्या कार्रवाई करेगा और भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।
