पंकज गुप्ते- बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट ने जाली दस्तावेज के सहारे सरकारी सिस्टम में सेंध लगाने वालों को अपने आदेश के माध्यम से कड़ा संदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अगर किसी ने धोखाधड़ी या कूट रचित (फोर्ज्ड) मार्कशीट के आधार पर नियुक्ति पाई है, तो उसकी सेवा समाप्ति के लिए किसी लंबी- चौड़ी विभागीय जांच की जरूरत नहीं। जस्टिस पार्थ प्रीतम साहू की सिंगल बेंच कोंडागांव के एक शिक्षक की याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि धोखाधड़ी सबकुछ खत्म कर देती है।
दरअसल पूरा मामला जगदलपुर के कोंडागांव में कार्यरत शिक्षाकर्मी वर्ग 2 के पद पर नियुक्त शिक्षक सीताराम साहू से जुड़ा हुआ है। वर्ष 2007 में जिसकी नियुक्ति हुई थी। विभाग को जांच में पता चला कि उनकी बीएड की मार्कशीट फर्जी है। जब पंडित रविशंकर शुक्ल यूनिवर्सिटी रायपुर से इसका सत्यापन कराया गया, तो यूनिवर्सिटी ने लिखित जवाब दिया कि यह मार्कशीट उनके रिकार्ड से मेल नहीं खाती और यूनिवर्सिटी द्वारा जारी नहीं की गई। इसके आधार पर विभाग ने सीताराम साहू की सेवा समाप्त कर दी गई। नौकरी समाप्ति के खिलाफ शिक्षक ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई। जिसमें कहा गया कि, उन्हें बर्खास्तगी के पहले न तो सुनवाई का मौका दिया गया और न ही चार्जशीट जारी किया गया।
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विभाग ने दिया यह तर्क
इधर विभाग ने तर्क प्रस्तुत कर कहा कि उन्हें पूरा मौका दिया गया पर वे कोई दूसरी मार्कशीट प्रस्तुत नहीं कर सके। दोनों हो पक्षों की दलील सुनने के बाद हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि धोखाधड़ी से मिली नौकरी कानून के नजर में शून्य। साथ ही हाईकोर्ट ने शिक्षक की याचिका को खारिज कर दिया।