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बिलासपुर हाईकोर्ट ने बस्तर विश्वविद्यालय के दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए नए अभ्यावेदन पर 4 माह के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया है।

पंकज गुप्ते- बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बस्तर विवि के दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में अहम आदेश पारित किया है। जस्टिस पार्थ प्रतिम साहू की सिंगल बेंच ने याचिकाकर्ताओं को ताजा अभ्यावेदन प्रस्तुत करने की अनुमति देते हुए संबंधित विश्वविद्यालय प्रशासन को 4 माह के भीतर उस पर निर्णय लेने का निर्देश दिया है। 

दरअसल मामला रिट पिटीशन 4686 (सन 2025) में सुनवाई के दौरान सामने आया, जिसमें 9 याचिकाकर्ताओं ने बताया कि वे वर्ष 2009 से शहीद महेंद्र कर्मा विवि में दैनिक वेतनभोगी के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने अपनी सेवाओं के नियमितीकरण की मांग की थी, जिस पर पूर्व में भी न्यायालय ने अभ्यावेदन पर विचार करने का निर्देश दिया था, लेकिन अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया। 

सीमित प्रार्थना पर कोई आपत्ति नहीं जताई गई
याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता सिद्धार्थ पाण्डेय ने तर्क दिया कि, सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाल के वर्षों में दिए गए कई महत्वपूर्ण निर्णयों में 10 वर्ष से अधिक सेवा दे चुके दैनिक/संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण पर जोर दिया गया है। वहीं राज्य और विश्वविद्यालय की ओर से इस सीमित प्रार्थना पर कोई आपत्ति नहीं जताई गई। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि, याचिकाकर्ता 10 वर्ष से अधिक की निरंतर सेवा पूरी कर चुके हैं, ऐसे में उनके अभ्यावेदन पर विचार करते समय सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों को ध्यान में रखना आवश्यक है। 

नया अभ्यावेदन 4 माह में निपटाएं अधिकारी- अदालत 
अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि, यदि याचिकाकर्ता नया विस्तृत अभ्यावेदन प्रस्तुत करते हैं, तो संबंधित प्राधिकारी उसे विधि के अनुसार यथाशीघ्र, अधिमानतः 4 माह के भीतर, निपटाएं। यह आदेश प्रदेश के हजारों दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो लंबे समय से नियमितीकरण की मांग कर रहे हैं।

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