पंकज गुप्ते- बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में बिजली करंट से हाथियों और अन्य वन्यजीवों की लगातार हो रही मौतों को लेकर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। मामले में स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई के दौरान हस्तक्षेपकर्ता नितिन सिंघवी की ओर से विभिन्न समाचार पत्रों की कटिंग प्रस्तुत कर बताया गया कि मार्च माह में राज्य के अलग-अलग जिलों में करंट की चपेट में आने से कई हाथियों, वन्यजीवों और लोगों की मौत हुई है।
कोर्ट को बताया गया कि 12 मार्च को रायगढ़ जिले के घरघोड़ा वन परिक्षेत्र में दो हाथी शावकों की करंट लगने से मौत हो गई थी, वहीं 14 मार्च को सूरजपुर जिले के प्रतापपुर क्षेत्र में खेत में लगाए गए करंट वाले तार से एक हाथी की जान चली गई। इसी तरह सारंगढ़-भिलाईगढ़ में जंगली सूअर के शिकार के लिए बिछाए गए अवैध करंट की चपेट में आने से एक युवक की मौत हुई, जबकि 26 मार्च को मैनपाट क्षेत्र में एक युवक और एक लोमड़ी की भी करंट से मौत हो गई।
दो शावकों सहित मादा भालू की हुई थी मौत
कोरबा के सकोदा जंगल में 11 केवी लाइन के संपर्क में आने से दो शावकों सहित मादा भालू की मौत का मामला भी सामने आया। गंभीर घटनाओं पर नाराजगी जताते हुए हाईकोर्ट ने अपर मुख्य सचिव, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, नया रायपुर से विस्तृत शपथ पत्र मांगा है।
कोर्ट ने पूछा- क्या उठाए गए कदम
कोर्ट ने पूछा है कि ये घटनाएं किन परिस्थितियों में हुईं और इन्हें रोकने के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 5 मई को निर्धारित की गई है।
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