पंकज गुप्ते- बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एसईसीएल कर्मी की मौत के बाद उसके आश्रित को आर्थिक सहायता नहीं देने के मामले में अहम फैसला सुनाया है। जस्टिस संजय के. अग्रवाल के सिंगल बेंच ने स्पष्ट किया कि यदि किसी कर्मचारी की मृत्यु खदान दुर्घटना या अन्य कारणों से हो जाती है अथवा वह चिकित्सकीय रूप से अयोग्य हो जाता है, तो राष्ट्रीय कोयला वेतन समझौता के तहत उसके आश्रित महिला सदस्य को 6 हजार रुपए प्रतिमाह आर्थिक सहायता देना अनिवार्य है।
दरअसल मामले में याचिकाकर्ता अमरेश राजवाड़े ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर एसईसीएल प्रबंधन के निर्णय को चुनौती दी थी। उनके पिता रामप्रसाद राजवाड़े एसईसीएल विश्रामपुर में कार्यरत थे, जिनकी 2012 में कार्य के दौरान मौत हो गई थी। इसके बाद उनकी माता सोना बाई ने आश्रित रोजगार और आर्थिक सहायता के लिए आवेदन किया, लेकिन उन्हें न नौकरी मिली और न ही आर्थिक मदद। वर्ष 2014 में उनकी भी मृत्यु हो गई। इसके बाद अमरेश राजवाड़े ने स्वयं आश्रित रोजगार के लिए आवेदन किया, जिसे एसईसीएल प्रबंधन ने 2017 में खारिज कर दिया। इस फैसले के खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट की शरण ली। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने उन्हें आश्रित रोजगार के लिए अपात्र माना, लेकिन राष्ट्रीय कोयला वेतन समझौता के प्रावधानों के तहत मासिक आर्थिक सहायता का हकदार माना।
कोर्ट ने प्रतिमाह 6 हजार रुपए देने के दिए निर्देश
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि कर्मचारी की मृत्यु के बाद उसकी पत्नी को न तो रोजगार दिया गया और न ही आर्थिक सहायता, जो पूरी तरह अनुचित है। ऐसे में याचिकाकर्ता का मामला समझौते के दायरे में आता है और उसे आर्थिक सहायता मिलनी चाहिए। हाईकोर्ट ने एसईसीएल प्रबंधन को निर्देश दिया है कि वह याचिकाकर्ता को आवेदन की तिथि से ही 6 हजार रुपए प्रतिमाह आर्थिक सहायता प्रदान करे।