रायपुर। लोकसभा में नक्सलवाद के मुद्दे पर चर्चा के दौरान छत्तीसगढ़ भाजपा के मुख्य प्रवक्ता और सांसद संतोष पांडेय ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि 31 मार्च 2026 तक देश को नक्सलवाद से मुक्त करने का लक्ष्य सिर्फ सरकार का नहीं, बल्कि 140 करोड़ देशवासियों का संकल्प है और अब नक्सलवाद इतिहास बनने की ओर है।
उन्होंने कहा कि सशस्त्र आंदोलन के नाम पर लंबे समय तक छत्तीसगढ़ के बड़े हिस्से को नक्सलवाद ने जकड़ रखा गया था। अब नक्सलवाद इतिहास बन कर रह जाएगा। दशकों तक लाल आतंक का साया हमारे आदिवासी क्षेत्रों पर मंडराता रहा है और आज जब 31 मार्च 2026 तक भारत को हथियारबंध नक्सलवाद से मुक्त करेंगे तो यह केवल एक सरकारी लक्ष्य नहीं है बल्कि 140 करोड़ भारतीयों की साझा प्रतिज्ञा है और यह प्रतिज्ञा जब नेतृत्व लेता है तो पूरा देश उन पर विश्वास करते हुए उनके पीछे खड़ा होता है। यह दृढ़ इच्छा शक्ति के संकल्प का प्रभाव है।
आंतरिक सुरक्षा पर मोदी-शाह का नाम स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा
सांसद श्री पांडेय ने कहा कि, भारत के इतिहास में जब आंतरिक सुरक्षा के ऊपर चर्चा की जाएगी, शोध किया जाएगा तो देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी और देश के गृहमंत्री अमित शाह का नाम स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा।
जिस तरह देश के एकीकरण के लिए जब रियासतों का विलयीकरण हुआ था तब देश के पूर्व गृह मंत्री लौह पुरूष सरदार वल्लभभाई पटेल के फौलादी नेतृत्व और इतिहास को हम सब स्मरण करते हैं और आज जब छत्तीसगढ़ के बस्तर, बीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा, कोंडागांव, कांकेर, नारायणपुर, भानुप्रतापपुर, मानपुर, मोहला, मदनवाड़ा, बगड़गट्टा, रेंगाखार, गरियाबंद, संपूर्ण छत्तीसगढ़ की ओर से मैं अपने नेतृत्व के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने खड़ा हुआ हूं।
नक्सल मुक्त करने पर छत्तीसगढ़ केंद्र का ऋणी
आगे उन्होंने कहा कि देश के अंगभूत हम सभी घटक हैं किंतु हमारा यह नेतृत्व और उस कर्तव्य को आपने निभाया। बस्तर जिसे दण्डकारण्य कहते हैं पूरे छत्तीसगढ़ को आपने नक्सल मुक्त किया है इस पर हम छत्तीसगढ़ वासी उऋण नहीं हो सकते। इस ऋण को हम कभी नहीं चुका सकते।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक टाईमलाइन के तहत एक लक्ष्य लेकर, एक टारगेट निर्धारित के नक्सलवाद का समूल नाश किया है। उन्होंने कहा कि 40 साल तक माओवाद नहीं यह मवाद था जिसने पूरे छत्तीसगढ़ को रेड कॉरिडोर बना रखा था। ऐसे मवाद को केन्द्र सरकार ने ऑपरेशन करके निकालने का काम किया है।
76 सीआरपीएफ के जवान शहीद हुए तो जेएनयू में जश्न मनाया गया
सांसद श्री पांडेय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में कई वीभत्स घटनाएं विभीषिका घटित हुई जिसे छत्तीसगढ़ की जनता जानती है और जिसके ऊपर गुजरा है वह जानता है। माओवादियों ने कई बड़े-बड़े हमले किए 2010 में 76 सीआरपीएफ के जवान शहीद हुए हो गए, किंतु दिल्ली के जेएनयू में जश्न मनाया गया।
वह कौन लोग हैं जो बस्तर में हमारे सीआरपीएफ के सैनिक, जवान, प्रहरी शहीद होते हो रहे थे तो जश्न मनाते थे। अब यह देश की जनता जान चुकी है। उन्होंने घटना का जिक्र करते हुए कहा कि हिड़मा से लेकर पापाराव तक 2013 में झीरम घाटी में नरसंहार हुआ था उसका भी गुनहगार हिड़मा ही था जिसने नेताओं को मौत के घाट उतार दिया।
2021 में बस्तर-सुकमा के बीच में 22 जवान शहीद हुए थे और मेरे क्षेत्र के आठ विधानसभा में से सात विधानसभा नक्सलवाद से प्रभावित रहा हैं। मदनवाड़ा में 29 जवान के साथ एसपी विनोद चौबे शहीद हुए थे। जिन परिवारों के साथ घटना घटित हुई उसका दर्द वही जान सकता है।
देश की सीमाओं से ज्यादा हत्याएं छत्तीसगढ़ के जंगलों में हुई
सांसद श्री पांडेय ने कहा कि, जितनी हत्याएं देश की सीमाओं में नहीं हुई उतनी हत्या छत्तीसगढ़ में हुई है। इस दर्द को मिटाने का काम प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार ने किया है। इस संवेदना को समझ करके केन्द्र सरकार आगे बढ़ रही है।
नक्सलियों के समूल नाश में लगे सीआरपीएफ के कोबरा फोर्स, आरटीबीपी, बीएसएफ, एसएसबी, डीआईजी, डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड, एसटीएफ, छत्तीसगढ़ आर्म्ड फोर्स, बस्तर फाइटर, झारखंड जैगुवार ऐसे लगभग 18 से 19 फोर्सेस ने अपना सर्वस्व अर्पण किया।








