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गणेश मिश्रा- बीजापुर। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में आदिवासी बच्चों की शिक्षा और पोषण से जुड़ी पोटाकेबिन व्यवस्था में बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है। फर्जी उपस्थित दर्ज कर सरकारी राशन और छात्रवृत्ति की राशि में लाखों रुपये के गबन के मामले में जिला प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए चार पोटाकेबिन अधीक्षकों को निलंबित कर दिया है। जांच में सामने आया कि कागजों में बच्चों की उपस्थिति शत-प्रतिशत दर्शाई गई, जबकि वास्तविकता में कई महीनों तक आधे से भी कम बच्चे मौजूद थे।

मिली जानकारी के अनुसार, निलंबित किए गए अधीक्षकों में आदित्य ठाकुर, प्रभारी अधीक्षक नेताजी सुभाषचंद्र बोस बालक आवासीय विद्यालय भटवाड़ा, लख्मीनारायण ओढदल प्रभारी अधीक्षक आवासीय विद्यालय आवापल्ली, पुष्पलता सोनी प्रभारी अधीक्षक आवासीय विद्यालय संगमपल्ली और रघुनंदन मौर्य प्रभारी अधीक्षक आवासीय विद्यालय भटवाड़ा शामिल हैं। 

 

जिले के विभिन्न पोटाकेबिनों का निरीक्षण
दरअसल, बीजापुर जिले के पोटाकेबिनों में वित्तीय अनियमितता और राशन घोटाले की शिकायत जिला शिक्षा विभाग को प्राप्त हुई थी। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए संयुक्त संचालक शिक्षा ने जांच के आदेश दिए। जांच दल ने जिले के विभिन्न पोटाकेबिनों का निरीक्षण किया, जहां चौंकाने वाली अनियमितताएं सामने आईं।

छात्रों की मौजूदगी के नाम पर राशन घोटाला
जांच के दौरान पाया गया कि, जुलाई से अक्टूबर के बीच बड़ी संख्या में छात्र अनुपस्थित थे, इसके बावजूद उनकी उपस्थिति कागजों में दर्ज की गई और उनके नाम पर सब्जी, राशन तथा अन्य सामग्री की आपूर्ति दिखाई गई। जब बच्चे मौजूद ही नहीं थे, तो उनके नाम पर मंगाए गए राशन और सब्जियों का उपयोग कहां हुआ।

छात्रवृत्ति राशि में भी गड़बड़ी
जांच दल ने स्पष्ट रूप से माना कि, राशन और सब्जी के नाम पर सरकारी धन का व्यापक दुरुपयोग किया गया है। पोटाकेबिन अधीक्षकों की मिलीभगत से शासन को लाखों रुपये की आर्थिक क्षति पहुंचाई गई। इसके साथ ही छात्रवृत्ति राशि में भी गड़बड़ी किए जाने के प्रमाण मिले हैं। मामले को गंभीर मानते हुए शासन ने तत्काल प्रभाव से चारों पोटाकेबिन अधीक्षकों को निलंबित कर दिया है। वहीं, आगे की कार्रवाई और विस्तृत जांच की प्रक्रिया भी जारी है।