बीजापुर जिले के माड़ इलाके में 45 साल बाद नक्सल प्रभाव खत्म होने के बाद ग्रामीण विकास की राह पर आगे बढ़ रहे हैं। ग्रामीण सरकार से मूलभूत सुविधाओं की मांग कर रहे हैं।

गणेश मिश्रा- बीजापुर। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के माड़ इलाके में नक्सलवाद और नक्सलियों का वर्चस्व खत्म होते ही 45 सालों बाद पूरे माड़ इलाके के ग्रामीणों को अब जाकर वास्तविक आजादी भी मिल चुकी है। अब माड़ इलाके के ग्रामीण शासन से मिलने वाली उन तमाम सुविधाओं का लाभ लेना चाहते हैं जिनसे वे 45 सालों से वंचित थे। 

ग्रामीण की जिद्द विकास पाने की ललक का परिणाम देखिए कि, अब बारिश के पहले माड़ इलाके में राशन के साथ स्कूल आश्रम अस्पताल एवं अन्य निर्माण कार्यों की सामग्री पहुंचाने के लिए बीजापुर के माड़ और नारायणपुर के ओरछा ब्लॉक के सैकड़ो ग्रामीण ग्राम पंचायत और जिला पंचायत की मदद से भैरमगढ़ के इंद्रावती नदी पर प्लास्टिक और सीमेंट की बोरियों रेत भरकर पुल बनाने में जुटे हुए हैं। अच्छी बात यह है कि, इस कार्य मे आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में शामिल हो चुके एक दर्जन से अधिक वो नक्सली भी शामिल है,जो कभी पुल पुलिये, सड़क और विकास कार्यो का विरोध करते हुए नजर आते थे।

नक्सलियों के कब्जे से मुक्त
ग्रामीणों का कहना है कि, साढ़े चार दशकों से पूरा माड़ इलाका नक्सलियों के कब्जे में रहा है। उस दौरान उन्हें राशन सामग्री से लेकर शिक्षा स्वास्थ्य और मूलभूत सुविधाओं से वंचित रहना पड़ा था परंतु अब यह पूरा इलाका नक्सलियों के कब्जे से मुक्त हो चुका है। इसलिए वे चाहते हैं कि, माड़ इलाके में भी विकास कार्य हो और सरकार से मिलने वाले राशन व अन्य सुविधाओं का वे लाभ ले सकें। 

बोरियों में रेत भरकर एक अस्थाई पुल का निर्माण
यही वजह है कि, सैकड़ो ग्रामीण ग्राम इतामपारा के एक बुलावे पर बीजापुर और माड़ इलाके के बीच से बहने वाली प्राण दायनी इंद्रावती में एकत्र हो चुके हैं। पिछले 5 दिनों से लगातार सीमेंट और प्लास्टिक के बोरियों में रेत भरकर एक अस्थाई पुल का निर्माण कर रहे हैं ताकि बारिश के पहले माड़ इलाके के सभी गांवों तक आसानी से राशन पहुंचा जा सके। 

सरकार से सुविधाओं की मांग कर रहे ग्रामीण
इसके साथ ही विकास कार्यों से जुड़ी सामग्रियां भी पहुंच सके ग्रामीणों की मांग यह भी है कि, माड़ इलाके में अब साप्ताहिक बाजार की भी शुरुआत की जानी चाहिए ताकि उन्हें रोजमर्रा की सामग्री के लिए भैरमगढ़ या नारायणपुर जाने की आवश्यकता ना पड़े। पूरा माड़ इलाका नक्सल मुक्त होने के बाद मूलभूत सुविधाओं की मांग के साथ ग्रामीणों के इस मेहनत और सरकार से अपनी मांगों के बीच जिला प्रशासन माड़ इलाके के ग्रामीणों के लिए कितना गंभीरता दिखा पाता है यह तो आने वाला वक़्त ही बताएगा।