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■एसबीआई के मुख्य प्रबंधक, शाखा प्रबंधक भी आरोपी बनाए गए
■ इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देश पर अपराध दर्ज

रायपुर। इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देश पर सीबीआई ने पांच हजार 717 करोड़ रुपए के लोन डिफॉल्ट मामले में छत्तीसगढ़ से संबंधित एसकेएस इस्पात की आधा दर्जन से ज्यादा कंपनी सहित 26 कंपनियों के खिलाफ अपराध दर्ज किया है। इसके अलावा सीबीआई ने भारतीय स्टेट बैंक के मुख्य प्रबंधक रोहित पराशर तथा सिविल लाइंस स्टेट बैंक के शाखा प्रबंधक के खिलाफ भी अपराध दर्ज किया है। 

बिजली उत्पादन तथा वितरण व्यवसाय करने वाली मेसर्स एसकेएस इस्पात एंड पॉवर लिमिटेड तथा उसकी संबद्ध कंपनियों पर आरोप है कि इन लोगों ने छह हजार 170 करोड़ रुपए  लोन लेने में गड़बड़ी की है। इन कंपनियों ने भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई), मेसर्स एल एंड टी इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस लिमिटेड, मैसर्स पीटीसी इंडिया फाइनेंस लिमिटेड और स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर के माध्यम से लोन हासिल किया था। एसकेएस से जुड़ी कंपनियों ने लोन लेने के बाद लोन चुकाने के बजाए पांच हजार 717 करोड़ रुपए की संपत्ति गलत तरीके से नीलामी कर दी।

इन कंपनियों के खिलाफ अपराध दर्ज

सीबीआई ने जिन लोगों के खिलाफ अपराध दर्ज किया है, उनमें मेसर्स एसकेएस पॉवर लिमिटेड से जुड़ी कंपनी के डायरेक्टर अनिल महाबीर गुप्ता, अभय कुमार साहू, अशोक कुमार साहू, महावीर प्रसाद गुप्ता, दीपक गुप्ता, एसकेएस कंपनी की मुंबई ब्रांच के अनीश अनिल गुप्ता के अलावा मुंबई में कंपनी के दो प्रमोटर तथा डायरेक्टर के अलावा रायपुर के श्री कृष्णा स्ट्रक्चर्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक प्रेमलता गुप्ता, सीए प्रीतम बोरिया, मेसर्स सीथर लिमिटेड के निदेशक कंडासामी सुब्बुराज, लाभेश्वरी एजेंसी के निदेशक संदीप कुमार गुप्ता, हंसनाथ यादव, मुंबई में एसकेएस के दो प्रमोटर तथा डायरेक्टर के अलावा कोलकाता की रिवर व्यू, रणभूमि, एवरन्यू सिक्योरिटीज कंपनी सहित अन्य कंपनियां शामिल हैं।

अपने ही पते की कंपनी के पास नीलाम

सीबीआई जांच में यह बात सामने आई है कि एक कंपनी मेसर्स एंटविकेलन इंडिया एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड को जो दो हजार करोड़ रुपए की संपत्ति नीलाम की थी, उस कंपनी का पता एसकेएस इस्पात का था। जिस कंपनी को एसकेएस इस्पात का था। जिस कंपनी को एसकेएस इस्पात ने संपत्ति बेची थी, उस कंपनी का वर्ष 2019 में एसकेएस इस्पात में विलय हो गया।

डमी कंपनी बनाकर शेयर लेन-देन

सीबीआई जांच में यह बात सामने आई है कि फर्जीवाड़ा करने वाली कंपनियों ने धोखाधड़ी करने डमी कंपनी बनाकर शेयर लेन-देन की है। साथ ही फर्जी शेयर लेन-देन के माध्यम से डायवर्सन, राउंड ट्रिपिंग फंड्स की साथ ही फर्जी कंपनियों के माध्यम से ब्रिटिश वर्जिन द्वीप समूह, बरमूड़ा के ब्रिटिश विदेशी इलाकों में ऋण ट्रांसफर करने का आरोप है। सीबीआई की टीम ने मुंबई, कोलकाता, रायपुर, भुवनेश्वर, त्रिची में 14 स्थानों पर छापेमारी कर आपत्तिजनक दस्तावेज तथा सामान जब्त किए हैं।