बेमेतरा। छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के सबसे बड़े शिक्षा संस्थान डाइट में द्वितीय चरण के बालवाड़ी प्रशिक्षण का समापन हो गया। डाइट बेमेतरा के प्राचार्य जे के घृतलहरे के मार्गदर्शन में द्वितीय चरण के प्रशिक्षण के अंतर्गत अंतिम दिवस के सत्र की शुरुआत की। 

डाइट प्राचार्य जे के घृतलहरे ने प्रशिक्षार्थी से कहा कि, बालवाड़ी के बच्चे जिज्ञासु, ऊर्जावान और खेल खेलने सीखने वाले होते हैं। बच्चों में सामाजिक व भावनात्मक विकास होता है व बच्चों के साथ शेयर करना सीखते हैं और छोटे-छोटे काम खुद से करना सीखते हैं जिससे उनमें विश्वास बढ़ता है। शिक्षक बच्चों की समझ व्यवहार को समझकर उनका सर्वांगीण विकास करें। मन के हारे, हार है, मन के जीते जीत। पूरे मन से छोटे-छोटे बच्चों के हित के लिए काम कीजिए। 

प्रशिक्षार्थियों को प्रमाण पत्र देकर प्राचार्य जे के घृतलहरे ने किया सम्मानित 

नवोदय में चयन होने पर 51 हजार रुपए का दिया जाएगा पुरस्कार 
उन्होंने ने कहा कि, नन्हें मुन्ने बच्चों का भविष्य गढ़िए। यह जिम्मेदारी आपकी है। इन नन्हें मुन्ने बच्चों को अपना बच्चा समझकर उनका भविष्य संवारिये। उन्होंने सभी प्रशिक्षार्थी साथियों के बीच एक घोषणा की। अगर कोई भी विद्यालय जहां पांचवी की दर्ज संख्या 10 से अधिक है उस विद्यालय में 10 से अधिक विद्यार्थियों का जवाहर नवोदय विद्यालय में चयन होता है। तो उस विद्यालय को मेरी ओर से 51 हजार रुपए की राशि पुरस्कार स्वरूप प्रदान की जाएगी। इसे आप सब एक चुनौती के रूप में स्वीकार कर काम कीजिए। 

संज्ञानात्मक विकास और उनके विभिन्न चरणों के बारे में जानकारी दी 
मास्टर ट्रेनर्स विधि शर्मा ने संज्ञानात्मक विकास और उनके विभिन्न चरणों पर विस्तार से चर्चा की। संवेदी विकास, अवधारणा पठन, मानसिक कौशल संख्यात्मक विकास पर विस्तार से चर्चा की गई। संवेदी विकास के अंतर्गत स्वाद, देखकर, सुनकर स्पर्श कर बच्चे पहचान कर सकते हैं। 2026 के लिए राज्यपाल पुरस्कार के लिए नामांकित शिक्षिका व मास्टर ट्रेनर्स शीतल बैस ने संख्या पूर्व अवधारणा पर विस्तार पूर्वक जानकारी दी। जैसे तुलना करना, वर्गीकरण करना, क्रमबद्धता, छांटना, एक-एक की संगति, पहचान करना, मिलान करना और समूहीकरण। तुलना करने में हल्का है या भारी है, लंबा है या छोटा है। कम या ज्यादा में हम तुलना कर सकते हैं। इसी प्रकार वर्गीकरण में मध्यान्ह भोजन में जो सब्जी आती है उसे हम अलग-अलग कर सकते हैं। रंग, आकार, छोटा बड़ा आदि के आधार पर वर्गीकरण कर सकते हैं। 

द्वितीय चरण के बालवाड़ी प्रशिक्षण का समापन 

हर महीने एक थीम पर काम करना
अजीम प्रेमजी फाउंडेशन से साकेत बिहारी ने थीम आधारित गतिविधियों पर अपनी बातें रखी। मेरा शरीर, मैं और मेरा दोस्त, मौसम, रिमझिम बारिश, पानी रे पानी, जानवरों की दुनियां, आई ठंड, हवा, आओ करें सवारी, हमारे मददगार, गर्मी, धरती अंबर चांद सितारे, हमारे त्योहार। बालवाड़ी के बच्चों को 14 थीम के अंतर्गत बताना है। हर महीने एक थीम पर काम करना। मेरा शरीर के अंतर्गत खाने की बहुत सारी चीजें, सामान, शरीर की देखभाल, नहाना, अंगों की जानकारी, शरीर की साफ सफाई आदि की जानकारी दिया जा सकता है

प्रशिक्षार्थियों को प्रमाण पत्र देकर किया सम्मानित- प्राचार्य जे के घृतलहरे 
मास्टर ट्रेनर्स भूपेंद्र कुमार साहू ने वयस्क अधिगम के सिद्धांत और सुगमकर्ता की भूमिका पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि, सुगमकर्ता वह व्यक्ति है जो सीखने की प्रक्रिया को आसान बनाता है, न कि सिर्फ जानकारी देता है सुगमकर्ता सीखने का वातावरण बनाता है। अनुभव को सीख से जोड़ता है। अंत में डाइट प्राचार्य जे के घृतलहरे ने सभी प्रशिक्षार्थियों को बहुत प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया।

तृतीय चरण का प्रशिक्षण 9 से 11 फरवरी तक
इस प्रशिक्षण के प्रभारी वरिष्ठ व्याख्याता जी एल खुटियारे है। बालवाड़ी प्रशिक्षण के अंतर्गत तृतीय चरण का प्रशिक्षण 9 से 11 फरवरी तक डाइट बेमेतरा में होगा। इसमें सभी बच्चे हुए 96 शिक्षक-शिक्षिकाओं को अनिवार्यता आना होगा। 

ये लोग रहे मौजूद
इस अवसर पर प्रशिक्षार्थी गोपेश्वरी साहू, लक्ष्मी साहू, कांति ठाकुर, सुमनलता साहू, कीर्ति एक्का, अर्चना राजपूत, मिथिला अहिरवार, सुभाष पाटिल, सोनल नामदेव, लक्ष्मी बंजारे, अंजू देवांगन, जितेंद्र चौहान, अनिल कुंजाम, ईश्वर साहू सहित 126 प्रशिक्षार्थी उपस्थित रहे।